NSA के तहत हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार पर लगाया 10 लाख का जुर्माना
2024 में हुई संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई हिरासत को रद्द कर दिया है।
कोर्ट ने कहा कि पुलिस हिरासत में कथित कबूलनामे के आधार पर NSA के तहत हिरासत का आदेश नहीं दिया जा सकता।
कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का वह फैसला भी रद्द कर दिया, जिसमें हिरासत को बरकरार रखा गया था। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
पुलिस हिरासत में कथित कबूलनामे पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि पुलिस हिरासत में दर्ज कथित कबूलनामे को निवारक हिरासत के लिए जरूरी "व्यक्तिपरक संतुष्टि" का आधार बनाया जा सकता है या नहीं।
अफरोज ने दावा किया था कि उसकी गिरफ्तारी भी इसी कबूलनामे के आधार पर हुई थी, जो कानूनन स्वीकार्य नहीं है। उसने यह भी कहा कि केवल कई आपराधिक मामलों का होना निवारक हिरासत को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है।
अफरोज पर 2024 में शाही जामा मस्जिद के कोर्ट के आदेश पर हुए सर्वे के बाद भड़की हिंसा का कथित मास्टरमाइंड होने का आरोप है। हिंसा में 4 लोगों की मौत हुई थी।
मामले में वह घटना के करीब 54 दिन बाद गिरफ्तार हुआ था और बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी। इसके बावजूद 13 अक्टूबर, 2025 को उसके खिलाफ NSA के तहत निवारक हिरासत का आदेश जारी किया गया था।