आंध्र प्रदेश में दोबारा लागू नहीं होगा 34 प्रतिशत आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण बहाल करने की बात कही गई थी। कोर्ट ने राज्य के हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
हाई कोर्ट ने कहा था कि आंध्र प्रदेश के पास ऐसा कोई पुख्ता डेटा नहीं है, जिससे आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा को पार किया जा सके, जो पहले के फैसलों में तय की गई थी।
आंध्र प्रदेश के आरक्षण के सबूत पर्याप्त नहीं
आंध्र प्रदेश ने अपने पक्ष में एक राज्यव्यापी सर्वे और कुछ स्थानीय डेटा पेश करने की कोशिश की, लेकिन दोनों अदालतों ने इसे पर्याप्त सबूत नहीं माना। इससे एक बात साफ हो गई है: अगर राज्य आरक्षण की सीमा में बदलाव करना चाहते हैं, तो उन्हें पक्के और मजबूत सबूत पेश करने होंगे, सिर्फ ऐसे आंकड़े नहीं जो पर्याप्त न हों।
यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य ने 50 प्रतिशत की सीमा पार करने की कोशिश की हो और असफल रहा हो। इसलिए, भविष्य में ऐसे किसी भी बदलाव की बहुत बारीकी से जांच की जाएगी।