क्या सरकारी आंकड़ों में छिपा है हाथियों का सच? सुप्रीम कोर्ट ने मांगी DNA रिपोर्ट और 'गज सूचना' पर जानकारी
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय और हाथी कल्याण समिति को निर्देश दिए हैं कि वे बंदी हाथियों की निगरानी को गंभीरता से लें। कोर्ट ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और बंदी हाथी स्वास्थ्य देखभाल और कल्याण समिति (CEHWC) से कहा है कि वे सभी बंदी हाथियों की DNA प्रोफाइलिंग पर एक पूरी रिपोर्ट पेश करें।
इसके साथ ही, 'गज सूचना' ऐप पर हाथियों से जुड़ी सारी जानकारी अपलोड करने का आदेश भी दिया गया है। मालिकी प्रमाण पत्रों का नियमित रूप से नवीनीकरण करने पर भी जोर दिया गया है।
सरकारी आंकड़ों में बंदी हाथियों की संख्या का बेमेल
अब यहां एक बड़ी बात सामने आई है: सरकारी आंकड़े मेल नहीं खा रहे। सरकार बताती है कि 2026 तक देश में 2,725 बंदी हाथी हैं, लेकिन MoEFCC के नोट में दी गई श्रेणियों के अनुसार, यह संख्या 2,984 हो जाती है।
हैरानी की बात यह है कि 2019 के बाद से निजी मालिकों के पास मौजूद हाथियों की संख्या में कोई बदलाव नहीं दिखाया गया है। इससे लग रहा है कि शायद सही जानकारी नहीं दी जा रही है। कोर्ट ने इन विशालकाय जीवों (हाथियों) के बेहतर स्वास्थ्य और रहन-सहन पर भी जोर दिया है। इसके लिए खास क्लीनिक और उनके लिए उचित आवास बनाने की बात कही गई है। कोर्ट का साफ कहना है कि हाथियों की अच्छी देखभाल कागजी कार्यवाही से कहीं ज्यादा जरूरी है। इस मामले में क्या प्रगति हुई, इसकी अगली सुनवाई अक्टूबर में होगी।