सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: पैकेटबंद खाने पर FSSAI के पूछे तीखे सवाल
सुप्रीम कोर्ट भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के एक ऐसे प्रस्ताव पर गौर कर रहा है, जिसमें पैकेट में बंद उन खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट चेतावनी वाले लेबल लगाने की बात है, जिनमें चीनी, नमक या वसा की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इन लेबलों का मकसद है कि पैकेट पर ही लाल रंग के हेक्सागन चिह्न (जैसे 'हाई शुगर' या 'हाई फैट') दिखाकर, लोगों को सेहतमंद विकल्प चुनने में मदद मिल सके। अभी यह पक्का नहीं हुआ है कि ये लेबल्स लगाना जरूरी होगा या नहीं। साथ ही, कोर्ट यह भी पूछ रहा है कि क्या फूड कंपनियों को अपनी पैकेजिंग बदलने के लिए वाकई पूरे एक साल की जरूरत है।
जजों ने FSSAI से जल्दी कदम उठाने को कहा
अदालत ने साफ किया है कि वह इस नियम को जल्द से जल्द लागू करवाना चाहती है। जजों ने कहा कि यह आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने FSSAI को निर्देश दिए हैं कि अदालत जो भी नियम तय करे, उनका पूरी सख्ती से पालन किया जाए। मंजूरी मिलने के बाद, FSSAI के पास मसौदा नियम जारी करने और उन्हें अंतिम रूप देने के लिए चार महीने का समय होगा। इसके बाद खाद्य व्यवसायों को 365 दिनों की स्वैच्छिक कार्यान्वयन अवधि मिलेगी।