अयोध्या जमीन अधिग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट की पैनी नजर, फैसले से बदलेगा भविष्य का तरीका?
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में एक आवासीय योजना के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़े एक मामले में अपना फैसला अभी रोक दिया है। कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि क्या यह जमीन सही तरीके से अधिग्रहित की गई थी। दरअसल, इस मामले की शुरुआत तब हुई जब श्री सरयू नगर विकास समिति ने एक पुराने अदालती आदेश को चुनौती दी। उस आदेश में बताया गया था कि जिन लोगों की जमीन ली जा रही है, उन्हें 'भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' के तहत सही मुआवजा और कहीं और बसाने में मदद मिलनी चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने लगाए ये आरोप
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि इस परियोजना से स्थानीय लोगों पर क्या असर होगा, इसकी जांच जैसे कई अहम कदम उठाए ही नहीं गए। उन्होंने यह भी कहा कि और जमीन का अधिग्रहण करने से पहले खाली पड़ी जमीन को लेना कानूनी तौर पर गलत था। वहीं, सरकार ने अपने जवाब में कहा कि उसने सभी नियमों का पूरी तरह पालन किया है। सरकार ने यह भी साफ किया कि अयोध्या के विकास के लिए यह प्रोजेक्ट कितना अहम है। इस मामले का अंतिम फैसला भविष्य में होने वाले भूमि अधिग्रहण के तरीकों को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।