राम मंदिर चंदे के खुलासे पर फंसाने की साजिश? सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक उपाध्याय को गिरफ्तारी से बचाया
सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक उपाध्याय को गिरफ्तारी से फिलहाल राहत दे दी है। उपाध्याय का कहना है कि गाजियाबाद पुलिस ने उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत झूठे आरोप में फंसाया है। उनका आरोप है कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के लिए आए चंदे के कथित दुरुपयोग को उजागर किया था, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई। गाजियाबाद पुलिस ने उन पर एक रोड रेज की घटना को लेकर आरोप लगाए हैं, लेकिन उपाध्याय मानते हैं कि यह उन्हें राम मंदिर के चंदे के कथित दुरुपयोग का खुलासा करने की कीमत चुकानी पड़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने FIR का ब्योरा मांगा
कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में उपाध्याय के खिलाफ कोई कार्रवाई न करें। साथ ही, उनसे FIR का पूरा ब्योरा भी मांगा है। उनके वरिष्ठ वकील प्रदीप राय ने कहा कि यह मामला बदले की भावना से दर्ज किया गया है। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या दिल्ली पुलिस से इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। फिलहाल, उपाध्याय का अगला कदम FIR की कॉपी लेना है। अगर जरूरत पड़ी तो वे हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।