सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-हसन पर सरकार से पूछा- महिलाओं को कब मिलेगा इंसाफ?
सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-हसन को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सरकार से जवाब मांगा है। यह एक ऐसी प्रथा है जिसमें एक मुस्लिम पुरुष 3 महीने तक हर महीने एक बार 'तलाक' बोलकर अपनी शादी खत्म कर सकता है। इस मामले को एक मुस्लिम महिला की तरफ से दायर एक अलग लंबित याचिका के साथ जोड़ दिया गया है, जिसमें उसने अपने पति द्वारा दिए गए तलाक-ए-हसन को चुनौती दी है।
याचिका में धर्म-निरपेक्ष तलाक नियमों की मांग
याचिका में कहा गया है कि तलाक-ए-हसन जैसे एकतरफा तलाक से महिलाओं और बच्चों को नुकसान होता है। इसलिए, इसमें ऐसे तलाक नियमों की मांग की गई है जो लैंगिक रूप से न्यायपूर्ण हों, धर्म-निरपेक्ष हों और सभी के अधिकारों का सम्मान करें। याचिका बहुविवाह (एक से ज्यादा शादी) के खिलाफ कानूनी सुरक्षा भी चाहती है, जिसमें मौजूदा पत्नी की स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति के बिना ऐसा न हो। यह मामला 2017 में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद सामने आया है, जिसमें तत्काल 3 तलाक पर रोक लगा दी गई थी।