सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अरनामै केस में मौत की सजा पाए आरोपी बरी, जांच पर गंभीर सवाल
असम में 2017 में प्रधानाध्यापिका अरनामै बोरुआ के बलात्कार और हत्या के मामले में मौत की सजा पाए मोइनुल हक को सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया है। न्यायाधीशों ने कहा कि मोइनुल हक को इस अपराध से जोड़ने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे, इसलिए उन्होंने हाई कोर्ट के पिछले फैसले पर ही अपनी मुहर लगा दी। मोइनुल हक को बरी करने के इस फैसले को चुनौती देने वाली असम सरकार की अपील को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया।
कोर्ट ने जांच की कमियां बताईं और दोषसिद्धि को रद्द किया
कोर्ट ने इस मामले की जांच में कई गंभीर कमियां गिनाईं। कोर्ट का कहना था कि केस से जुड़े अहम सबूत गायब थे और सबूतों की कड़ी भी इतनी पुख्ता नहीं थी कि किसी को इतने बड़े आरोप में दोषी ठहराया जा सके। न्यायाधीशों ने इस बात पर जोर दिया कि आपराधिक मामलों में सजा केवल पक्के और ठोस सबूतों के आधार पर ही होनी चाहिए, न कि किसी शक या संदेह पर। मोइनुल हक पर सबूत मिटाने का जो आरोप था, उसमें मिली सजा को भी रद्द कर दिया गया। खास बात यह है कि मोइनुल ने खुद इसके खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की थी।