मराठा आरक्षण पर टकराव बढ़ा: सरकार ने रखी वैधता की शर्त, जरांगे ने दी मुंबई में प्रदर्शन की चेतावनी
महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह मराठा आरक्षण की मांगों पर तभी गौर करेगी, जब वे संवैधानिक रूप से वैध और कानूनी तौर पर स्वीकार्य होंगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब कार्यकर्ता मनोज जरांगे मराठा आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि मराठा समुदाय के लोगों को 'कुणबी जाति प्रमाण पत्र' दिए जाएं, ताकि उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में अन्य पिछला वर्ग (OBC) आरक्षण का लाभ मिल सके। उन्होंने सरकार को इस पर फैसला लेने के लिए 12 सितंबर तक का समय दिया है।
जरांगे ने दी मुंबई में प्रदर्शन की चेतावनी
जरांगे अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो मुंबई में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए जाएंगे। जरांगे का दावा है कि मराठों का कुणबी वंश से जुड़ाव दर्शाने वाले 58 लाख दस्तावेज मिले हैं, लेकिन सरकार इन आंकड़ों को कम करने की कोशिश कर रही है। आरक्षण के साथ वह महाराष्ट्र में आरक्षण आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी पुलिस केस वापस लेने और पिछले आंदोलनों में जान गंवाने वाले परिवारों को सहायता देने की भी मांग कर रहे हैं।