धोखे में फंसी महिला को मद्रास हाई कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत, कोर्ट ने कहा- पति है असली अपराधी
मद्रास हाईकोर्ट ने राजलक्ष्मी को अग्रिम जमानत दे दी है। राजलक्ष्मी पर आरोप था कि उन्होंने मायाकृष्णन से शादी की, जबकि मायाकृष्णन पहले से शादीशुदा थे और राजलक्ष्मी को इसकी जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगर किसी शख्स की पहले से कोई पत्नी या पति जीवित है, तो वही अपराधी माना जाएगा।
अगर कोई अविवाहित व्यक्ति ऐसे किसी शादीशुदा शख्स से शादी करता है और उसे पिछली शादी के बारे में पता नहीं होता, तो वह धारा 82 के तहत अपराधी नहीं होता है। इसीलिए राजलक्ष्मी, जिन्होंने खुद को धोखे का शिकार बताया था, को इस धारा के तहत दोषी नहीं माना जा सकता।
अदालत ने राजलक्ष्मी के लिए 25,000 का बांड देने का आदेश दिया
जस्टिस एन रमेश ने यह भी देखा कि क्या धारा 85 के तहत क्रूरता के आरोप राजलक्ष्मी पर लागू होंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि राजलक्ष्मी को 'रिश्तेदार' नहीं माना जा सकता, क्योंकि वह खुद को मायाकृष्णन की कानूनी पत्नी समझती थीं।
अदालत ने साफ किया कि मायाकृष्णन ने ही दोनों महिलाओं को गुमराह किया था। फिलहाल, राजलक्ष्मी को 25,000 रुपये का बांड भरना होगा और अगले चार हफ्तों तक हर दिन पुलिस के सामने पेश होना होगा। मायाकृष्णन के खिलाफ जांच अभी जारी है।