गुवाहाटी हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, रद्द किया 10 लाख रुपये का गुजारा भत्ता
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गुवाहाटी हाई कोर्ट ने आपसी सहमति से हुए तलाक के एक मामले में 10 लाख रुपये के गुजारा भत्ते के आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि जब पति-पत्नी दोनों ही इसकी मांग नहीं कर रहे थे, तो गुजरा भत्ता देने की कोई जरुरत नहीं थी। दरअसल, उनकी तलाक की याचिका में साफ-साफ लिखा था कि वे कोई गुजारा भत्ता या आर्थिक मदद नहीं मांगेंगे। जस्टिस मृदुल कुमार कलिता ने साफ किया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के अनुसार, गुजारा भत्ता तभी दिया जा सकता है, जब कोई पक्ष विशेष रूप से इसकी मांग करे।
पति ने अपील पर हाई कोर्ट ने पक्षों की इच्छा पर जोर दिया
ट्रायल कोर्ट का आदेश उनके आपसी समझौते के खिलाफ था, इसलिए पति ने हाई कोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने जोर देकर कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को सही कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए और दोनों पक्षों की मर्जी का सम्मान करना चाहिए।