दवाओं की मार्केटिंग में 'तोहफों' का खेल खत्म, सरकार ने समीक्षा के लिए बनाई समिति
भारत सरकार ने हाल ही में एक नई समिति बनाई है। यह समिति देखेगी कि दवा कंपनियां अपने उत्पादों की मार्केटिंग कैसे करती हैं। इसका मुख्य मकसद यह पक्का करना है कि डॉक्टर मरीजों को दवा लिखते समय किसी कंपनी के मुफ्त तोहफों या उपहारों के बहकावे में न आएं।
यह कदम ऐसी चिंताओं के बाद उठाया गया है, जहां दवा कंपनियों की मार्केटिंग के गलत तरीकों को लेकर सवाल उठे थे। सरकार चाहती है कि सब कुछ पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से हो।
समिति 2024 के नियमों की करेगी समीक्षा
यह समिति उन मौजूदा नियमों पर गौर करेगी, जिनमें आखिरी बार 2024 में बदलाव किया गया था। कोई भी नया सुझाव देने से पहले, यह कमेटी अलग-अलग समूहों के लोगों से भी बात करेगी।
कमेटी को अपनी पहली बैठक से दो महीने का समय मिला है। इस दौरान उन्हें यह पता लगाना होगा कि क्या ये नियम ठीक से काम कर रहे हैं या इनमें बड़े सुधार की जरूरत है। खासकर इसलिए ताकि डॉक्टरी फैसले ईमानदारी से लिए जाएं और दवा कंपनियों की मार्केटिंग में कोई गड़बड़ी न हो।