दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, अब महिलाओं पर लग सकेगें सामूहिक दुष्कर्म के आरोप
दिल्ली हाई कोर्ट से एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय कानून के तहत अब महिलाओं पर भी सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लग सकता है, भले ही उन्होंने खुद शारीरिक रूप से इस अपराध को न किया हो। जस्टिस एजे भंभानी ने साफ किया कि कानून में पुरुष शब्द की बजाय व्यक्ति शब्द का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब है कि अगर कोई भी व्यक्ति (चाहे वह महिला हो या पुरुष) किसी समूह के साथ मिलकर और एक ही इरादे के साथ कोई अपराध करता है, तो उसे दोषी ठहराया जा सकता है।
कोर्ट ने फैसले को POCSO अधिनियम से जोड़ा
यह फैसला एक नाबालिग लड़की से जुड़े मामले में आया है, जिसमें उसकी मां भी आरोपी थी। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि सिर्फ पुरुषों पर ही यह आरोप लग सकता है, लेकिन कोर्ट ने बताया कि 2013 में हुए बदलावों के बाद सामूहिक दुष्कर्म को एक अलग अपराध माना गया है और यह किसी भी लिंग पर लागू होता है। अदालत ने यह भी साफ किया कि इस व्याख्या से योन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) जैसे कानूनों के तहत पीड़ितों को और भी सुरक्षा मिल सकेगी। इससे सामूहिक अपराधों में जिम्मेदारी तय करना ज्यादा स्पष्ट और सबको शामिल करने वाला हो जाएगा।