दिल्ली कोर्ट का दो टूक, 60,000 रुपये से ज्यादा कमाने वाली महिला को नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता
दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में उस महिला को अंतरिम भरण-पोषण देने से मना कर दिया, जिसकी मासिक आय 60,000 रुपये से ज्यादा है। महिला के पति ने अदालत में दावा किया था कि उसकी पत्नी हर महीने एक लाख रुपये से भी ज्यादा कमाती है। न्यायाधीश ने साफ किया कि सिर्फ इसलिए कि पति-पत्नी की कमाई में अंतर है, भरण-पोषण का हक अपने आप नहीं मिल जाता। चूंकि, महिला पढ़ी-लिखी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है, इसलिए वह किसी अतिरिक्त मदद की हकदार नहीं है।
पति को 14,000 रुपये बच्चे का भरण-पोषण देना होगा
अदालत ने यह जरूर साफ किया कि पति को बच्चे का भरण-पोषण देना जारी रखना होगा। यह रकम पहले 7,000 रुपये महीना तय की गई थी, जिसे फरवरी 2021 से बढ़ाकर 14,000 रुपये महीना कर दिया गया है। हालांकि, पति को यह रकम ज्यादा लगी और उसने इसे निवेश करने की बात कही, लेकिन न्यायाधीश ने समझाया कि बच्चे का भरण-पोषण उसकी स्कूल फीस, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए होता है। अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि बच्चे की कस्टडी से जुड़े विवाद का उसकी वित्तीय सहायता के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता।