दिल्ली की कोर्ट का बड़ा आदेश, कहा- बेरोजगार पिता भी परिवार नहीं छोड़ सकता
दिल्ली की एक कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर कोई बेरोजगार भी है, तो परिवार का साथ छोड़ने का उसे कोई हक नहीं। दरअसल, निचली अदालत ने एक महिला को आर्थिक मदद देने से इनकार कर दिया था। महिला ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली कोर्ट में अपील की, जिसके बाद न्यायाधीश ने उसके पति को अपने छोटे बेटे की परवरिश के लिए हर महीने 6,000 रुपये देने का आदेश दिया है।
पति ने 2015 से बेटे को नहीं दी कोई आर्थिक मदद
कोर्ट ने कहा कि पति की अपने बच्चे की आर्थिक मदद करने की कानूनी जिम्मेदारी बनती है, फिर चाहे उसकी नौकरी की स्थिति कैसी भी हो। हालांकि, पहले पत्नी द्वारा लगाए गए शारीरिक हमले और क्रूरता के आरोपों को सबूतों की कमी के चलते खारिज कर दिया गया था, लेकिन न्यायाधीश ने यह भी देखा कि पति ने साल 2015 से बेटे को कोई मदद नहीं दी है। अदालत ने पति के इस तर्क को सिरे से नकार दिया कि वह बेरोजगार है या उसकी पत्नी पढ़ी-लिखी है, इसलिए उसे मदद नहीं करनी चाहिए।