आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने मां की उपेक्षा करने वाले बेटे को दिया झटका, रद्द किया संपत्ति का तोहफा
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने अपने बेटे को दी गई संपत्ति का गिफ्ट रद्द कर दिया था। अदालत ने यह फैसला इसलिए दिया, क्योंकि बेटे ने अपनी मां की देखभाल नहीं की थी। महिला ने साल 2011 में अपने बेटे को परिवार की संपत्ति दे दी थी। उन्हें उम्मीद थी कि बेटा उनकी देखभाल करेगा, लेकिन जब बेटे ने ऐसा नहीं किया, तो बुजुर्ग महिला ने मदद के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम के तहत कार्रवाई की। यह कानून बुजुर्गों को उपेक्षा से बचाने और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है।
जस्टिस वेंकटेश्वरलू निम्मागड्डा ने बेटे को प्रस्ताव को बताया नाकाफी
दरअसर, उनकी बेटी ही अपनी मां की जरूरतों का पूरा ध्यान रख रही थी और आगे भी उनकी देखभाल करने का भरोसा दिया था। बेटे ने अपनी मां को कुछ पैसे और रहने के लिए जगह देने का प्रस्ताव रखा, लेकिन अदालत ने इसे काफी नहीं माना। जस्टिस वेंकटेश्वरलू निम्मागड्डा ने साफ कहा कि बुजुर्गों को सिर्फ वादे नहीं, बल्कि असल में सहारा और इज्जत चाहिए होती है। इसी वजह से वह संपत्ति वापस मां को लौटा दी गई।