इलाहाबाद हाई कोर्ट का कड़ा रुख: जैविक बेटे से मिलते हैं 8000, सौतेले बेटे से भरण-पोषण नहीं!
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि यदि किसी मां को उसके जैविक (असली) बेटे से पहले से ही आर्थिक मदद मिल रही है, तो वह अपने सौतेले बेटे से भरण-पोषण की मांग नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि जब मां को अपने असली बेटे से हर महीने 8,000 रुपये मिल रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में वह सौतेले बेटे से भी सहायता पाने की हकदार नहीं है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा, याचिका सौतेले बेटे को परेशान करने वाली है
अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए यह भी कहा कि चूंकि मां को अपने जैविक बेटे से पहले से ही आर्थिक सहायता मिल रही है, ऐसे में वह सौतेले बेटे से और भरण-पोषण की मांग नहीं कर सकती। न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी में यह भी साफ किया कि मां आर्थिक रूप से कमजोर नहीं है और उसका असली बेटा अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह निभा रहा है। इसलिए सौतेले बेटे पर भी भुगतान का दबाव डालने का कोई कानूनी औचित्य नहीं बनता। कोर्ट ने यह भी साफ तौर पर कहा कि यह याचिका सिर्फ सौतेले बेटे को परेशान करने के इरादे से ही दायर की गई लगती है।