असम राइफल्स पर हमले के पीछे 'ईस्टर्न फ्लैंक' का हाथ होने का शक
असम राइफल्स के जवानों पर हुए हमलों के पीछे ईस्टर्न फ्लैंक नाम के एक नए गुट का हाथ होने का संदेह है, जो NSCN(IM) से अलग हो गया था। इसी महीने 6 जुलाई को मणिपुर के उखरुल जिले में और 13 जुलाई को नागालैंड में ये हमले हुए। इन हमलों में 3 सैनिकों ने अपनी जान गंवाई। पहले हमले के बाद, अधिकारियों ने 3 संदिग्धों को गिरफ्तार किया और आस-पास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया गया।
म्यांमार से काम कर रहे निकाले गए NSCN(IM) नेता
ईस्टर्न फ्लैंक की अगुवाई 2 ऐसे नेता कर रहे हैं, जिन्हें हिंसा शुरू होने से कुछ ही दिन पहले NSCN(IM) से निकाल दिया गया था। ये दोनों म्यांमार से काम करते हैं और NSCN(IM) के साथ भारत के शांति समझौते का हिस्सा नहीं हैं। यही वजह है कि उन पर आसानी से नजर नहीं रखी जा पाती। ऐसा लगता है कि ये हमले चल रहे नागा-कुकी संघर्ष और इलाके को लेकर नेताओं के आपसी विवादों से जुड़े हुए हैं।
अधिकारियों का यह भी मानना है कि नागालैंड में हुए हालिया हमले का मकसद सुरक्षा बलों को इस बात को लेकर भ्रमित करना था कि असली गुनहगार कौन है।