भारत में 10 प्रतिशत छात्रों में है आत्महत्या के विचार, सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
हाल ही में हुए एक राष्ट्रव्यापी सर्वे से पता चला है कि भारतीय कॉलेज के छात्र मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। पिछले छह महीनों में लगभग 15 प्रतिशत छात्रों ने बहुत अधिक परेशानी या तनाव महसूस किया। वहीं, इस सर्वे के मुताबिक, पिछले एक साल में करीब 10 में से एक छात्र को अक्सर आत्महत्या जैसे विचार आए हैं। ये चौंकाने वाले आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक टास्क फोर्स छात्र कल्याण पर अपनी अहम रिपोर्ट तैयार कर रही है। यह टास्क फोर्स IIT दिल्ली और IIT बॉम्बे में 2 छात्रों की मौत के बाद बनाई गई थी।
कैंपस में काउंसलिंग की सुविधा न होना है बड़ी समस्या
इस सर्वे में 2.43 लाख से ज्यादा छात्रों को शामिल किया गया था, जिसमें सामने आया कि लगभग 34 प्रतिशत छात्र कैंपस में किसी न किसी हद तक खुद को बाहरी समझते हैं। करीब 32 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि उनके कॉलेज में काउंसलिंग की कोई व्यवस्था ही नहीं है, जबकि 56 प्रतिशत छात्रों को प्रशासन पर भरोसा था कि वह गंभीर मुद्दों को निष्पक्षता से सुलझाएगा। पढ़ाई का दबाव, लगातार व्यस्त दिनचर्या और शिक्षकों का पर्याप्त सहयोग न मिलना छात्रों की सबसे आम शिकायतें रही हैं। अब यह टास्क फोर्स सभी कैंपसों में बेहतर मानसिक स्वास्थ्य संसाधन और न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाने की वकालत कर रहा है।