548वीं सूरदास जयंती: जिसने आंखों के बिना देखी कृष्ण लीला, आज भी क्यों गूंजते हैं उनके अमर पद?
इस साल 21 अप्रैल को सूरदास जयंती है, जो कवि-संत सूरदास के 548वें जन्मदिन का अवसर है।
यह दिन वैशाख शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है। भगवान कृष्ण को समर्पित उनके भावपूर्ण गीतों ने भक्ति आंदोलन पर गहरा प्रभाव डाला, और इस दिन उनके इसी योगदान को सम्मान दिया जाता है।
जश्न की शुरुआत सुबह 4:14 बजे से होगी और अगली सुबह 1:19 बजे तक जारी रहेगा।
सीही, हरियाणा में नेत्रहीन जन्मे सूरदास
सूरदास (1478-1581) का जन्म सीही, हरियाणा में हुआ था और वे जन्म से ही नेत्रहीन थे। उन्होंने कई चुनौतियों का सामना करते हुए हजारों पद रचे। हालांकि, आज उनके लगभग 8,000 पद ही उपलब्ध हैं।
उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना सूर सागर है, जिसमें कृष्ण के बचपन को बेहद भावपूर्ण पदों में वर्णित किया गया है। ये पद आज भी भक्ति सभाओं में गाए जाते हैं।
कई सदियों बाद भी, उनके पद लोगों को प्रेरित करते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी में आध्यात्मिकता का अहसास कराते हैं।