सुप्रीम कोर्ट की दिल्ली पुलिस की फेस रिकग्निशन तकनीक पर पैनी नजर, निजता के उल्लंघन का आरोप
सुप्रीम कोर्ट अब NEET-UG परीक्षा के विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई करेगा। राज्यसभा सांसद एए रहीम का आरोप है कि इस टेक्नोलॉजी के जरिए छात्रों, पत्रकारों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की असंवैधानिक निगरानी की गई।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बताया कि इस मामले को पुलिस की अन्य कार्रवाइयों, जैसे पेलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ी याचिकाओं के साथ ही सुना जाएगा।
दिल्ली पुलिस पर बायोमेट्रिक डेटा संग्रह का आरोप
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने CCTV कैमरों, ड्रोन, हैंडहेल्ड डिवाइसेस और FRT से लैस गाड़ियों का इस्तेमाल कर बायोमेट्रिक डेटा जमा किया। वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि ऐसा करना क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफिकेशन) एक्ट, 2022 और डेटा प्रोटेक्शन नियमों, दोनों का सीधा उल्लंघन है।
एक और चिंता यह भी है कि निजी एजेंसियों ने बिना किसी आधिकारिक अनुमति के इस डेटा को अपने पास रखा, जिससे नागरिकों के अधिकारों और उनके निजी डेटा के गलत इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।