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नाबालिग के गर्भपात पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- पढ़ने की उम्र में मां बनाने पर तुले
बलात्कार पीड़िता नाबालिग से जुड़े गर्भपात के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है

नाबालिग के गर्भपात पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- पढ़ने की उम्र में मां बनाने पर तुले

लेखन आबिद खान
Apr 30, 2026
01:01 pm

क्या है खबर?

एक बलात्कार पीड़िता नाबालिग की गर्भावस्था खत्म करने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यह एक बच्ची के साथ हुए बलात्कार का मामला है और पीड़िता को जिंदगी भर इसका जख्म झेलना पड़ेगा। ये मामला 15 वर्षीय बलात्कार पीड़िता से जुड़ा है, जो 30 हफ्ते की गर्भवती है। 24 अप्रैल को कोर्ट ने गर्भपात का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ AIIMS दिल्ली ने दोबारा अपील की थी।

टिप्पणी

कोर्ट ने कहा- पढ़ने की उम्र में बच्ची को मां बनाने पर तुले

कोर्ट ने कहा, "अगर गर्भपात से मां को कोई स्थायी दिव्यांगता नहीं होती है, तो गर्भपात की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। यह एक बच्ची के साथ हुए बलात्कार का मामला है। पीड़िता को जिंदगी भर इसका जख्म झेलना पड़ेगा। जरा सोचिए, वह अभी एक बच्ची है। इस समय उसे पढ़ना चाहिए, लेकिन हम उसे मां बनाना चाहते हैं। जरा उस दर्द और अपमान की कल्पना कीजिए, जो इस पूरी प्रक्रिया में बच्ची को झेलना पड़ा है।"

गर्भपात

किसी पर अनचाही प्रेग्नेंसी नहीं थोप सकते- कोर्ट

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि पीड़िता का गर्भ खत्म करने का फैसला पीड़िता और उसके माता-पिता का होना चाहिए, जिसमें चिकित्सा विशेषज्ञ उन्हें सही फैसला लेने में मदद करें। पीठ ने कहा, "किसी नाबालिग को बलात्कार से हुई गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर करना उसके पहले से सहे जा रहे दुख को और बढ़ा देगा। किसी भी इंसान पर अनचाही प्रेग्नेंसी थोपी नहीं जा सकती।"

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कानून

कोर्ट ने कहा- कानून को लचीला बनाए सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "जब बलात्कार की वजह से पीड़िता गर्भवती होती है, तो उसके लिए कोई समय सीमा नहीं होनी चाहिए। कानून को लचीला और बदलते समय के साथ तालमेल बिठाने वाला होना चाहिए। केंद्र सरकार कानून में बदलाव करें, ताकि बलात्कार से जुड़े ऐसे मुकदमों की सुनवाई एक हफ्ते के अंदर पूरी हो सके। आखिर बलात्कार की शिकार नाबालिग बच्चियों को लंबे समय तक मुकदमे का दंश क्यों झेलना पड़े।"

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AIIMS

AIIMS ने स्वास्थ्य-संबंधी चिंताएं जताईं

AIIMS की तरफ से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा, "इस चरण में गर्भपात करना शायद मेडिकल तौर पर मुमकिन न हो। गर्भ 30 हफ्ते का हो गया है और भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो चुका है। नाबालिग मां को गंभीर शारीरिक विकृतियों और लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है।" उन्होंने कोर्ट को गोद लेने के विकल्प का भी सुझाव दिया।

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