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सुप्रीम कोर्ट से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत, POCSO मामले में अग्रिम जमानत बरकरार
सुप्रीम कोर्ट में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की POCSO मामले में अग्रिम जमानत बरकरार रखी

सुप्रीम कोर्ट से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत, POCSO मामले में अग्रिम जमानत बरकरार

लेखन गजेंद्र
May 29, 2026
12:46 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को POCSO मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा शंकराचार्य की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया और उनकी प्रारंभिक निष्क्रियता पर सवाल उठाया। बता दें कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद शंकराचार्य और उनके शिष्य की गिरफ्तारी पर रोक लगी हुई है।

सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

याचिका पर सुननाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता ब्रह्मचारी से कहा, "आप पहले से वहां मौजूद थे। आपको इसके बारे में पता था। आपने क्या किया? आपको अपराध के बारे में पता था? अपराध होने के बाद। आप किसी और उद्देश्य से पुलिस के पास गए थे। आपने पुलिस को इसकी सूचना क्यों नहीं दी?" इस पर ब्रह्मचारी ने जवाब, "मुझे गंभीर चोट आई थी।" इसके बाद कोर्ट ने अपील खारिज कर दी।

जमानत

ब्रह्मचारी ने जमानत का किया था विरोध

शिकायतकर्ता ब्रह्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, जिनमें आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है और ऐसे मामले में अग्रिम जमानत केवल दुर्लभतम परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए। याचिका में अदालत द्वारा मीडिया से बातचीत पर लगाए गए प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन का भी मुद्दा उठाया गया है, जिसमें बताया गया कि निर्देशों के बावजूद आरोपी शंकराचार्य मीडिया से बातचीत कर रहे हैं।

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विवाद

क्या है मामला?

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर हुए विवाद के बाद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य और भाजपा के बीच टकराव चल रहा था। इस बीच स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य ब्रह्मचारी ने 8 फरवरी को शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ POCSO के तहत मामला दर्ज कराया। उनपर 18 जनवरी के आसपास दीक्षा प्राप्त करने आए नाबालिग बटुकों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। हाई कोर्ट ने मार्च में शंकराचार्य और उनके शिष्य को जमानत दी थी।

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