लाल रंग मतलब नॉन-वेज? FSSAI के निर्देश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
28 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट FSSAI की उस योजना पर सुनवाई करेगा जिसमें ज्यादा चीनी, नमक या फैट वाले खाने के पैकेट पर लाल चेतावनी लेबल लगाने की बात है।
इस कदम का मकसद यह है कि लोग एक नजर में ही पहचान सकें कि कौन-सा खाना सेहत के लिए ठीक नहीं है।
हालांकि, खाद्य उद्योग इस बात को लेकर चिंतित है। उनका मानना है कि जब मांसाहारी उत्पादों के लिए पहले से ही भूरा निशान और शाकाहारी के लिए हरा निशान होता है, तो लाल लेबल ग्राहकों को और भी ज्यादा उलझन में डाल सकते हैं।
FSSAI ने विकल्प चुनने में मदद के लिए लेबल का प्रस्ताव दिया
जब सुप्रीम कोर्ट ने इन नए लेबल की व्यावहारिकता पर सवाल उठाया, तो FSSAI ने सुझाव दिया कि इन्हें भारत के 2024 के आहार संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए एक साथ लागू किया जाए।
इसका मुख्य मकसद यह है कि पैकेजिंग के सामने ही साफ-साफ चेतावनी देकर सभी को समझदारी भरे और सही खाने का विकल्प चुनने में मदद मिले।