केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- प्रधानमंत्री कर रहे NEET की निगरानी; NTA को पड़ी फटकार
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय पात्रता सह-प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) पेपर लीक मामले में सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि जब तक जिम्मेदार व्यक्तियों को जवाबदेह नहीं ठहराया जाता, तब तक NEET के संचालन को प्रभावित करने वाले मुद्दे बने रहेंगे। उसने NTA में सुधार के लिए व्यापक योजना भी मांगी है। इस दौरान केंद्र ने कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) खुद NEET की निगरानी कर रहे हैं।
सीख
जवाबदेही तय की जानी चाहिए- कोर्ट
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने NTA को भंग करने की मांग वाली याचिकाओं पर विचार किया। इस दौरान पीठ ने कहा कि स्थिति संवेदनशील है और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को नियमित रूप से प्रभावित करने वाले मुद्दों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जब परीक्षाओं में कुछ गड़बड़ी होती है, तो यह पता नहीं चल पाता कि किसी विशेष कार्य के लिए कौन जिम्मेदार है।
सुनवाई
कोर्ट ने UPSC से सीखने को कहा
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान NTA से पूछा कि निगरानी तंत्र और निगरानी समितियों के होने के बावजूद इतनी बड़ी चूक कैसे हो सकती है। कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से तुलना करते हुए कहा कि देश की प्रमुख सिविल सेवा परीक्षा में पेपर लीक की घटनाएं कभी नहीं हुई और सुझाव दिया कि इसकी प्रणालियों से सबक सीखने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि जब तक जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान नहीं होती, तब तक मुश्किल होगी।
निगरानी
प्रधानमंत्री मोदी खुद कर रहे निगरानी
कोर्ट ने पेपर लीक को दर्दनाक बताते हुए कहा कि देश को छात्रों और उनके परिवारों को निराश नहीं करना चाहिए, यह बहुत दुखद है। यह सिर्फ छात्र नहीं, बल्कि परिवार का भी है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सहमति जताई कि जिम्मेदारी किसी पर तो आनी ही चाहिए। उन्होंने कोर्ट को सूचित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और सरकार युवाओं को लेकर चिंतित है।
हलफनामा
कोर्ट ने मान संसाधन विकास मंत्रालय से हलफनामा मांगा
कोर्ट ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से वार्षिक परीक्षाओं के संचालन और NTA में डोमेन विशेषज्ञों को शामिल करके मानव संसाधन में सुधार करने के तरीके के बारे में एक हलफनामा पेश करने को कहा है। कोर्ट ने कहा, "यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि NTA के पास 2024 और 2026 परीक्षा जैसी कोई घटना दोबारा न हो, इसके लिए पर्याप्त भौतिक और बौद्धिक संसाधन हों।" पीठ ने मामले को जुलाई में विचार के लिए सूचीबद्ध किया है।
समिति
NEET की मजबूत की सिफारिश करने वाली समिति भी हाजिर हुई
शुक्रवार की सुनवाई में 2024 में NEET पेपर लीक के बाद कोर्ट की ओर से गठित निगरानी समिति के प्रमुख डॉ के राधाकृष्णन भी कोर्ट में उपस्थित हुए। न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने प्रश्न उठाया कि समिति की सिफारिश और बाद में किए सुधारों के बावजूद वर्तमान विवाद कैसे पैदा हुआ? इस पर, राधाकृष्णन ने बताया कि समिति ने 35 दीर्घकालिक और 60 अल्पकालिक सिफारिशें दी थी, जिनमें अधिकांश लागू हुई है। पीठ ने समिति के कामकाज की विस्तृत जानकारी मांगी है।
याचिका
पेपर लीक के बाद अलग-अलग याचिकाओं में चिंता
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में से एक याचिका फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) की है, जिसमें NTA के पुनर्गठन की मांग है। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने NTA की कानूनी संरचना पर हमला किया और वर्तमान स्वरूप में इसके विघटन की मांग की गई। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और राजनीतिक नेता हरिशरण देवगन ने भी अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं।