CAA को लेकर मोदी और अमित शाह के खिलाफ FIR की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले वकील को फटकार लगाई और भविष्य में ऐसी कार्यवाही करने पर जुर्माने की चेतावनी दी। वकील ने वचन दिया कि वह ऐसी याचिका दायर नहीं करेगा, जिसके बाद कोर्ट ने उसके ऊपर पहले से लगे 50,000 रुपये का जुर्माना रद्द कर दिया।
घटना
राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था याचिकाकर्ता
बार एंड बेंच के मुताबिक, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ गुरुवार को राजस्थान हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ वकील की अपील पर सुनवाई कर रही थी। हाई कोर्ट ने याचिका को तुच्छ और प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए खारिज कर दिया गया था। साथ ही, वकील को 50,000 रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया गया था। इसके बाद वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुनवाई
CJI ने कहा- आपको लाइसेंस देकर किसने गलती की
CJI ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील से कहा कि क्या हाई कोर्ट ने जुर्माना नहीं लगाया? उन्होंने कोई वकील बैंड नहीं पहना है। ऐसा लगता है मानो वह दंगल में उतरे हों। जब पीठ को बताया गया कि वास्तव में जुर्माना लगाया जा चुका है, तो पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा, "आपको लाइसेंस देकर गलती किसने की? कृपया ऐसी याचिकाएं दायर न करें। लोग आप पर भरोसा करते हैं...अगर आप ये करेंगे तो लोग आप पर कैसे भरोसा करेंगे?"
सुनवाई
राजनीतिक विचारधारा से असहमति अपराध में बदल नहीं सकते- बागची
याचिकाकर्ता ने वैचारिक आपत्तियों का हवाला दिया, जिस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि राजनीति या विचारधारा से असहमति को आपराधिक अपराध में नहीं बदल सकते। उन्होंने कहा कि "अगर आप और दबाव डालेंगे तो हमें जुर्माना बढ़ाना पड़ेगा। विचारधारा या राजनीति आदि के आधार पर आपकी राय अलग हो सकती है, लेकिन इससे अपराध नहीं बनता। अगर संसद कोई अवैध कानून पारित करेगी तो क्या वह अपराध है? कृपया अपना बयान वापस लें। खुद को शर्मिंदा न करें।"