सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त योजनाओं पर जताई चिंता, कहा- राज्य कर्ज में लेकिन पैसे बांट रहे
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मुफ्त की योजनाओं पर चिंता जताई है। कोर्ट ने इस आदत की निंदा करते हुए कहा कि इससे देश के दीर्घकालिक आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न होगी। कोर्ट ने कहा, "सक्षम और अक्षम लोगों के बीच कोई भेद किए बिना अंधाधुंध तरीके से सरकारी लाभ बांटना केवल तुष्टीकरण है, जो देश के आर्थिक विकास के लिए अनुकूल नहीं है।"
टिप्पणी
कोर्ट बोला- सबकुछ मुफ्त मिला तो लोग काम क्यों करेंगे?
कोर्ट ने कहा कि ज्यादातर राज्य पहले से ही घाटे में हैं, फिर भी विकास को छोड़कर मुफ्त सुविधाएं बांट रहे हैं। कोर्ट ने कहा, "जो लोग भुगतान नहीं कर सकते, उन्हें सहायता देना समझ में आता है। लेकिन अमीर-गरीब में फर्क किए बिना सबको मुफ्त देना गलत नीति है। अगर सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, साइकिल और बिजली मिलती रही तो लोगों में काम करने की भावना कम हो जाएगी।"
विकास
राज्यों के पास विकास के लिए पैसा नहीं- कोर्ट
कोर्ट ने कहा, "राज्य को रोजगार के अवसर खोलने के लिए काम करना चाहिए। हम उस स्थिति तक पहुंच रहे हैं, जहां हम सीधे लोगों के खातों में नकद राशि भेज रहे हैं। अधिकांश राज्य घाटे में हैं, लेकिन फिर भी केवल इन्हीं नीतियों के कारण वे ऐसा करने को मजबूर हैं। फिर विकास के लिए कोई पैसा नहीं बचता? इसलिए केवल 2 ही काम हो रहे हैं- एक अधिकारियों को वेतन देना और दूसरा इन नीतियों पर खर्च करना।"
बड़ी टिप्पणियां
कोर्ट की बड़ी टिप्पणियां
राज्य एक साल में जो राजस्व इकट्ठा करते हैं, उसका 25 प्रतिशत विकास के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल किया जा सकता? कुछ लोग शिक्षा या बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं कर सकते, यह राज्य का कर्तव्य है कि उन्हें सुविधाएं प्रदान करे। चुनाव से ठीक पहले ऐसी योजनाएं क्यों घोषित की जा रही हैं? सभी राजनीतिक पार्टियों को अपनी विचारधारा पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। राज्यों के लिए इन नीतिगत ढांचों पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है।
मामला
क्या है मामला?
कोर्ट ने ये टिप्पणी तमिलनाडु विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। दरअसल, चुनाव से पहले तमिलनाडु विद्युत बोर्ड मुफ्त बिजली देने का वादा कर रहा है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ मामले पर सुनवाई कर रही है। बता दें कि विधानसभा चुनाव से पहले कई राज्यों ने नगद राशि समेत कई मुफ्त योजनाओं की घोषणा की थी।