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लिफ्ट हादसों में मौत पर कौन होगा जिम्मेदार? सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया साफ
लिफ्ट हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जिम्मेदारी तय की है

लिफ्ट हादसों में मौत पर कौन होगा जिम्मेदार? सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया साफ

लेखन आबिद खान
Jul 30, 2026
02:55 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में लिफ्ट से संबंधित दुर्घटनाओं में जिम्मेदारी तय की है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे हादसों में केवल एक संस्था जिम्मेदार नहीं होगी, बल्कि निर्माता, रखरखाव एजेंसी और इमारत मालिक को भी जिम्मेदार माना जाएगा। कोर्ट ने लिफ्ट को सार्वजनिक परिवहन के बराबर मानते हुए 'सामान्य वाहक' बताया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी कंपनियों पर बहुत अधिक सावधानी बरतने की कानूनी जिम्मेदारी होती है।

टिप्पणी

कोर्ट ने कहा- लिफ्ट सीधे सुरक्षा से जुड़ी

कोर्ट ने कहा, "लिफ्ट जैसी मशीनें सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़ी होती हैं, इसलिए इन्हें बनाने और रखरखाव करने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी सामान्य सेवा से कहीं ज्यादा होती है। लिफ्ट की देखभाल करने वाली कंपनी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी लोगों की सुरक्षा है। अगर कंपनी को पहले से खराबी का पता था, फिर भी उसने उसे समय पर ठीक नहीं किया या लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम नहीं किए, तो यह उसकी लापरवाही मानी जाएगी।"

बड़ी बातें

कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लिफ्ट बनाने और उसकी देखरेख करने वाली कंपनी की जिम्मेदारी तय होगी।

सिर्फ मशीन लगाना काफी नहीं, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी कंपनी का कर्तव्य है।

अगर लापरवाही से हादसा होता है, तो कंपनी को कानूनी कार्रवाई और मुआवजे का सामना करना होगा।

लिफ्ट में प्रवेश करने के बाद यात्रियों का कोई नियंत्रण नहीं रहता और वे अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से सिस्टम पर निर्भर रहते हैं।

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मामला

क्या है मामला?

ये 20 मार्च, 2003 को दिल्ली के CGO कॉम्प्लेक्स स्थित रॉयल एंड एयरवेज (R&AW) कार्यालय में हुई दुर्घटना से जुड़ा है। तब 13 लोगों को ले जा रही लिफ्ट संख्या 6 अचानक अटक गई थी।

बचाव अभियान के दौरान जब राजनयिक विपिन हांडा को बाहर निकाला जा रहा था, तभी लिफ्ट अचानक चल दी और हांडा फंस गए। उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

उनके परिवार ने कानूनी लड़ाई लड़ी और मामला सालों बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

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जांच

तकनीकी जांच में क्या सामने आया?

रिपोर्ट के अनुसार, जांच में सामने आया कि लिफ्ट पहले भी कई बार बिना वजह रुक जाती थी। यह भी कहा गया कि बिजली के वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की समस्या थी और इसे दूर करने के लिए जरूरी कदम समय पर नहीं उठाए गए।

ये भी सामने आया कि लिफ्ट ऑपरेटर को आपात स्थिति में बचाव का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया था और रखरखाव करने वाली कंपनी की टीम घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थी।

कंपनी

लिफ्ट बनाने वाली कंपनी पर आई 70 प्रतिशत जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट से पहले ये मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में गया था। 2014 में NCDRC ने माना कि हादसे की सबसे बड़ी जिम्मेदारी लिफ्ट लगाने वाले कंपनी OTIS की थी।

आयोग ने 70 प्रतिशत जिम्मेदारी OTIS, 25 प्रतिशत MES और 5 प्रतिशत R&AW पर तय की।

पीड़ित परिवार को 3.01 करोड़ रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया। बाद में OTIS ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

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