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खाद्य पदार्थों की लैबलिंग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- आप करेंगे या हम आदेश दें
सुप्रीम कोर्ट ने खाद्य पदार्थों की लैबलिंग को लेकर सरकार को फटकारा है

खाद्य पदार्थों की लैबलिंग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- आप करेंगे या हम आदेश दें

लेखन आबिद खान
Aug 13, 2026
03:12 pm

क्या है खबर?

पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी लेबल लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकारा है। कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार ये नहीं कर सकती, तो वे करेंगे। कोर्ट ने कहा, "लोगों को यह जानने का अधिकार है कि वे क्या खा रहे हैं। उनके भोजन में कितनी चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट है। यह मामला केवल नियमों का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य, विशेष रूप से बच्चों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।"

दबाव

कोर्ट ने पूछा- क्या कंपनियों के आगे झुक रही सरकार?

कोर्ट ने कहा, "आप अदालत को हल्के में ले रहे हैं? सभी कॉरपोरेट घरानों की तरफ से आप पर बहुत दबाव है। आप उस दबाव के आगे झुक रहे हैं। हम यह जनहित में कर रहे हैं, अपने लिए नहीं कर रहे। आप हमारे आदेश का पालन क्यों नहीं कर रहे? आपने अब तक क्या किया है? हम आप पर पड़ रहे दबाव को जानते हैं। क्या आप इसे स्वयं करेंगे या हमें आदेश जारी करना होगा?"

टिप्पणी

कोर्ट ने कहा- हम किसी विशेष उत्पाद के खिलाफ नहीं

कोर्ट ने कहा, "देश में कितने लोग सूखे मेवे खरीद सकते हैं और कितने बच्चे कुरकुरे खरीदते हैं? यही सबसे बड़ा फर्क है। हम किसी उत्पाद के खिलाफ नहीं हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि इसे खरीदने वाले व्यक्ति को पता हो कि वह क्या खा रहा है। यह आपका (केंद्र सरकार) आखिरी मौका है। अगली बार फैसला हम तय करेंगे।"

मामले की सुनवाई जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ कर रही थी।

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सरकार

सरकार ने क्या तर्क दिया?

FSSAI और सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बृजेंद्र चाहर ने कहा, "मुश्किल यह है कि हर भोजन पर लाल निशान लगा होगा। चाहे वह नमकीन हो या कुछ और। चेतावनी लिखनी होगी कि यह हानिकारक है। वसा की अनुमेय सीमा 10 ग्राम प्रतिदिन है। 2 अंडों में भी 11 ग्राम वसा होता है। विकसित देशों में भोजन सादा होता है, उसमें चीनी और वसा कम होती है, ये मानक भारतीय पारंपरिक भोजन पर लागू नहीं होंगे।"

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मामला

क्या है मामला?

मामला पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के सामने वार्निंग लेबल से जुड़ा है।

प्रस्ताव है कि जिन खाद्य पदार्थों में चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट निर्धारित सीमा से ज्यादा हो, उनके पैकेट के सामने ही स्पष्ट चेतावनी लिखी हो ताकि उपभोक्ता को खरीदने से पहले ही पूरी जानकारी मिल जाए कि वो क्या खा रहा है।

याचिकाकर्ता ने बताया कि 7 मार्च को हुई FSSAI की बैठक में लिए गए फैसले सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों के अनुरूप नहीं हैं।

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