UGC के समानता संबंधी नए नियमों के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
क्या है खबर?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से परिसरों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हाल में अधिसूचित नए नियमों के खिलाफ पूरे देश में आक्रोश भड़क गया है। नियमों में 'सामान्य श्रेणी' के छात्रों को शिकायत निवारण तंत्र के तहत शिकायत करने से बाहर रखा गया है, जिसको मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। जनहित याचिका में UGC के नियम 3(c) को मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की गई है।
आरोप
याचिकाकर्ताओं ने क्या लगाया है आरोप?
कोर्ट में याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के बहाने बनाया गया यह प्रावधान कुछ वर्गों (विशेषकर सामान्य वर्ग) के विरुद्ध भेदभाव को बढ़ावा देता है और कुछ समूहों को शिक्षा से वंचित कर सकता है। याचिका में कहा गया कि नियम 3(c), संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। यह UGC अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के विपरीत है।
विरोध
पूरे देश में हो रहा प्रदर्शन
UGC के नियम के खिलाफ लोग सड़कों पर भी उतर आए हैं। दिल्ली में सवर्ण समाज के लोगों ने UGC मुख्यालय के सामेन प्रदर्शन किया और घेराव किया। उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में भी लोगों का विरोध चल रहा है। रायबरेली में लोगों ने नेताओं को चूड़ियां भेजी हैं। सोशल मीडिया में भी इसके खिलाफ जोरदार अभियान चल रहा है। विरोध को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय जल्द ही पूरे मामले पर अपनी सफाई दे सकता है।