बजट 2026 से निजी स्पेस कंपनियों की क्या है मांग?
क्या है खबर?
बजट 2026 से पहले भारत की तेजी से बढ़ती प्राइवेट स्पेस इंडस्ट्री ने सरकार से अहम मांगें रखी हैं। कंपनियों का कहना है कि स्पेस प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की सरकारी खरीद बढ़ाई जाए और स्पेस एसेट्स को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जाए। इससे सस्ते फाइनेंस के रास्ते खुलेंगे और सेक्टर को तेजी से विस्तार करने में मदद मिलेगी। इंडस्ट्री का मानना है कि इससे भारत की स्पेस अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिलेगी।
फंडिंग
सरकारी खरीद और फंडिंग को बताया जरूरी
स्पेस सेक्टर से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि सैटेलाइट, लॉन्च व्हीकल और डाटा सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश की जरूरत होती है। ऐसे में लंबे समय की सरकारी खरीद और आसान कैपिटल एक्सेस बेहद अहम है। इंडस्ट्री का मानना है कि सरकार एक बड़े ग्राहक की भूमिका निभाए तो निजी कंपनियों का जोखिम कम होगा। इससे रिसर्च, डेवलपमेंट और बड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश को गति मिलेगी और भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत होगा।
अहमियत
क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा क्यों अहम?
इंडस्ट्री संगठनों ने सुझाव दिया है कि स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर को अलग क्रिटिकल सब-सेक्टर के रूप में मान्यता दी जाए। इससे कम ब्याज पर लंबे समय की फाइनेंसिंग उपलब्ध हो सकेगी और पूंजी लागत घटेगी। उनका कहना है कि भारतीय निजी कंपनियों ने सैटेलाइट, लॉन्च सिस्टम और अर्थ ऑब्जर्वेशन में अपनी क्षमता साबित की है। औपचारिक पहचान मिलने से निजी निवेश बढ़ेगा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
टैक्स राहत
टैक्स राहत और लंबी योजना पर जोर
स्पेस स्टार्टअप्स ने टैक्स, ड्यूटी और GST को आसान बनाने की भी मांग की है, ताकि लागत का दबाव कम हो सके। इसके साथ ही, सरकार और संस्थानों के साथ लंबे समय के सहयोग और साफ खरीद योजना की जरूरत बताई गई है। इंडस्ट्री का कहना है कि इससे छोटे सैटेलाइट, लॉन्च मिशन और डाटा एनालिटिक्स जैसे प्रोजेक्ट्स को भरोसे के साथ आगे बढ़ाया जा सकेगा और डिफेंस व गवर्नेंस में स्वदेशी समाधान मजबूत होंगे।