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सुप्रीम कोर्ट लैंगिक भेदभाव पर नाराज, महिला सैन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन में मिलेगा अधिकार 
सुप्रीम कोर्ट ने महिला सैन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन में अधिकार का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट लैंगिक भेदभाव पर नाराज, महिला सैन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन में मिलेगा अधिकार 

लेखन गजेंद्र
Mar 24, 2026
02:33 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सशस्त्र बलों के भीतर व्याप्त लैंगिग भेदभाव पर नाराजगी जताते हुए शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) महिला सैन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन (PC) में अधिकार देने की वकालत की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, उज्ज्वल भुयान और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने महिला अधिकारियों को राहत प्रदान करते हुए फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि प्रणालीगत पूर्वाग्रह के कारण भारतीय सेना, नौसेना-वायुसेना में सेवारत महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन से वंचित किया गया।

फैसला

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इन अधिकारियों के कैरियर मूल्यांकन उन धारणाओं पर आधारित थे, जिन्होंने उनकी कैरियर प्रगति को बाधित किया। कोर्ट ने कहा, "अवसरों की असमानता ने उनकी आपसी योग्यता को प्रभावित किया। उन्हें दीर्घकालिक कैरियर प्रगति के लिए अयोग्य माना गया...हम पाते हैं कि स्थायी कमीशन से इनकार करना प्रणालीगत भेदभाव का परिणाम था और उन्हें कैरियर प्रगति के लिए अयोग्य पाया गया। इसलिए, हम पूर्ण न्याय के लिए अनुच्छेद 142 का सहारा लेते हैं।"

कमीशन

20 वर्ष की सेवा पूरी करने वालों को पेंशन

कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि महिला अधिकारियों को ऐसी रियायत से वंचित करना गलत था। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) या अनुभाग बोर्डों द्वारा कुछ आवेदकों को पहले दी गई रियायत में कोई बाधा न आए। कोर्ट ने 20 वर्ष की सेवा पूरी कर चुकी उन अधिकारियों को एकमुश्त उपाय के रूप में पेंशन और परिणामी लाभ देने का आदेश दिया, जिन्होंने PC से इनकार करने पर पहले ही सेवा छोड़ी थी।

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मामला

क्या है मामला?

यह मामला SSC के तहत नियुक्त महिला अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं के समूह से संबंधित था, जिसमें महिलाओं ने सेवा में PC की मांग की थी। SCC के अंतर्गत नियुक्त अधिकारी निश्चित समय तक कार्यरत रहते हैं, जिसे सामान्यतः 14 वर्ष तक बढ़ा सकते हैं। PC न होने के कारण अधिकारियों को अपना अस्थायी कार्यकाल पूरा होने पर सेवा छोड़नी होती है। अदालत ने सशस्त्र बलों में मूल्यांकन विधियों और वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट प्रणाली की समीक्षा का निर्देश दिया।

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