सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की जगह अनाथ बच्चों को गोद लेने पर जोर दिया
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों पर सुनवाई के दौरान मनुष्यों की जगह कुत्तों के प्रति समर्थन जताने पर खेद जताया और अनाथ बच्चों को गोद लेने पर जोर दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारी की पीठ ने पशु प्रेमी की ओर से पेश वकील से पूछा कि वे सड़कों पर अनाथ बच्चों को गोद लेने की वकालत क्यों नहीं कर रहे? उन्होंने सवाल किया कि वे आवारा कुत्तों को गोद लेने तक सीमित क्यों हैं?
सुनवाई
वकील के तर्क पर पीठ हुई नाराज
बार एंड बेंच के मुताबिक, कोर्ट में एक 80 वर्षीय पशु प्रेमी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने कहा कि महिला सड़क पर 200 कुत्तों की देखभाल करती हैं, दिल्ली में लोग उन्हें 'डॉग अम्मा' कहते हैं। वकील ने कहा कि आवारा कुत्तों को गोद लेने के लिए प्रोत्साहन के साथ एक नीति पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नसबंदी और टीकाकरण प्रोत्साहन के साथ राष्ट्रीय गोद का अभियान शुरू हो सकता है।
सख्त
न्यायमूर्ति मेहता बोले- इंसानों के लिए इतनी लंबी बहस नहीं देखी
वकील के तर्क पर न्यायमूर्ति मेहता ने तीखे शब्दों में कहा, "क्या आप सचमुच ऐसा कह रहे हैं? युवा वकील ने अभी-अभी हमें सड़कों पर अनाथ बच्चों के आंकड़े दिखाए। शायद कुछ वकील उन बच्चों को गोद लेने की पैरवी कर सकते हैं। 2011 में न्यायाधीश बनने के बाद से मैंने इतनी लंबी बहसें कभी नहीं सुनीं। और अब तक किसी ने भी इंसानों के लिए इतनी लंबी बहस नहीं की है।" मामले की सुनवाई अब 20 जनवरी को होगी।
प्रस्ताव
कोर्ट ने मुआवजे का प्रस्ताव रखा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कुत्तों के काटने के मामलों में राज्यों के लिए भारी मुआवजा तय करने और कुत्तों को खाना खिलाने वालों को हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराने का प्रस्ताव रखा। कोर्ट ने कहा, "हर कुत्ते के काटने, हर मौत के लिए, हम राज्यों के लिए भारी मुआवजा तय करेंगे।" कोर्ट ने पूछा कि जब आवारा कुत्ते लोगों को काट सकते हैं और उनका पीछा कर सकते हैं, तो उन्हें खुलेआम घूमने की अनुमति क्यों दी जाती है?"