याचिकाकर्ता पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: INA को राष्ट्रीय सेना बनाने की मांग खारिज, कहा- 'इतिहास अदालत का काम नहीं'
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली इंडियन नेशनल आर्मी (INA) को भारत के स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रमुख शक्ति के तौर पर सरकारी मान्यता देने और नेताजी के जन्मदिन व INA के स्थापना दिवस को राष्ट्रीय दिवस घोषित करने की मांग की गई थी। अदालत ने साफ किया कि इतिहास और राजनीति जैसे विषयों पर फैसला करना अदालतों का काम नहीं है। ऐसे मामले अदालती कार्यवाही के दायरे में नहीं आते।
न्यायाधीशों ने याचिकाकर्ता की एक जैसी याचिकाओं पर लगाई रोक
न्यायाधीशों ने याचिकाकर्ता को ऐसी ही बार-बार याचिकाएं दाखिल करने पर फटकार लगाई। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इतिहास और राजनीति के मुद्दे अदालतों में तय नहीं किए जा सकते। इतना ही नहीं, न्यायाधीशों ने कोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि भविष्य में इस याचिकाकर्ता द्वारा जनहित याचिका के नाम पर दाखिल ऐसी किसी भी अर्जी को स्वीकार न किया जाए। अदालत ने यह भी याद दिलाया कि नेताजी से जुड़े कानूनी दावे अगर जरूरी हों, तो उनके परिवार की ओर से ही किए जाने चाहिए, खासतौर पर उनकी भतीजी अनीता बोस फाफ की ओर से।