सुप्रीम कोर्ट की फटकार: 10 सितंबर तक पैकेट बंद खाने पर लगाने होंगे चेतावनी लेबल
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह 10 सितंबर तक यह तय करे कि क्या पैकेट बंद खाने के सामान पर सामने की तरफ साफ चेतावनी वाले लेबल लगाना जरूरी होगा। देश में बढ़ते मोटापे और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाने की बढ़ती खपत को देखते हुए, जजों ने कहा कि अब लोगों की सेहत को सबसे ऊपर रखने का वक्त आ गया है।
अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि सरकार विकसित देशों में इस्तेमाल होने वाले फूड-लेबलिंग के मानकों को अपनाने में हिचकिचा क्यों रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने NFHS के मोटापे के आंकड़े बताए
अदालत ने कहा कि पैकेट बंद खाने के सामान में ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट होना एक बड़ी दिक्कत है। उनका मानना था कि अगर लेबल साफ होंगे तो लोग दुकान पर खरीदारी करते समय सही चुनाव कर पाएंगे।
कुछ गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) ने कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर मांग की थी कि पैकेट बंद खाने पर सामने की तरफ चेतावनी वाले लेबल लगाना अनिवार्य किया जाए।
अदालत ने इस मामले को बढ़ते मोटापे से जोड़कर देखा। NFHS 2019-21 के आंकड़ों के मुताबिक, 24 फीसदी भारतीय महिलाएं और 23 फीसदी भारतीय पुरुष या तो मोटे हैं या उनका वजन सामान्य से ज्यादा है। इतना ही नहीं, भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाने का बाजार 2009 से 2023 के बीच 150 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ गया है। अगर सरकार इस मामले में खुद कोई कदम नहीं उठाती है, तो अदालत को आगे निर्देश देने पर विचार करना पड़ सकता है।