960 करोड़ का 'जल जीवन' घोटाला: पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल की जमानत याचिका खारिज, जेल भेजा गया
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को जल जीवन मिशन के 960 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के सिलसिले में 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उन्हें पिछले हफ़्ते गिरफ्तार किया गया था और पुलिस हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद वे अदालत में पेश हुए। कोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो की पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग को खारिज कर दिया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
पानी के टेंडरों में नकली सर्टिफिकेट इस्तेमाल करने का मामला
इस मामले का मुख्य बिंदु पानी के प्रोजेक्ट्स के टेंडर हैं, जिन्हें नकली 'कंप्लीशन सर्टिफिकेट' दिखाकर हासिल किया गया था। मतलब, ऐसे दस्तावेज जो यह दिखाते हैं कि काम पूरा हो चुका है, जबकि असल में वह काम हुआ ही नहीं। इस घोटाले में न सिर्फ अधिकारी, बल्कि ठेकेदार भी जांच के घेरे में हैं।
पिछले महीने नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें कई सीनियर इंजीनियर भी शामिल हैं। सुबोध अग्रवाल के वकील ने अदालत में बताया कि उनके कार्यकाल में सिर्फ चार टेंडर जारी हुए थे, जबकि उनसे पहले के अधिकारी के समय 33 टेंडर हुए थे। वकील के इस बयान से लगता है कि इस पूरे मामले में और भी कई परतें हो सकती हैं, जिनकी गहराई से जांच होनी बाकी है।