अरुणाचल में 38 झीलें GLOF के गंभीर खतरे में, जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा तबाही का संकट
एक नए अध्ययन में पता चला है कि अरुणाचल प्रदेश की ऊंचाई वाली कुछ झीलें फटकर खतरनाक बाढ़ ला सकती हैं। इस प्राकृतिक घटना को ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहते हैं। कुल 127 झीलों का अध्ययन किया गया, जिनमें से 2 बहुत ज्यादा खतरे वाली और 36 मध्यम खतरे वाली पाई गईं।
ये मध्यम और ज्यादा जोखिम वाली झीलें अपर दिबांग वैली, वेस्ट कामेंग और तवांग में मुख्य रूप से हैं। इन इलाकों में आबादी रहती है और कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी चल रहे हैं।
बढ़ते तापमान से बड़ी हो रही हैं झीलें
इसकी एक बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन है। ग्लेशियर पिघलने और तापमान बढ़ने से ये झीलें लगातार बड़ी हो रही हैं, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। हालांकि, खतरनाक झीलों की संख्या 1980 के दशक के आखिर से लगभग उतनी ही बनी हुई है।
सरकार ने अब इन पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को बचाने के लिए बेहतर निगरानी, तेजी से चेतावनी देने वाले सिस्टम और स्मार्ट निकासी योजनाओं पर जोर दिया है।