हिमाचल प्रदेश में 525 प्रतिशत बढ़ी झीलें, पैदा हुआ ग्लेशियरों के फटने से गंभीर बाढ़ का खतरा
एक नए अध्ययन में सामने आया है कि 1990 से 2024 के बीच हिमाचल प्रदेश में ग्लेशियल झीलों की संख्या में 525 प्रतिशत का भारी इजाफा हुआ है। यह इजाफा तेजी से पिघलते ग्लेशियरों, बढ़ते तापमान और सर्दियों में कम बर्फबारी की वजह से हुआ है। इस दौरान इन झीलों का कुल क्षेत्रफल दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। खास बात यह है कि छोटी झीलें की संख्या भी 9 से बढ़कर 487 हो गई हैं।
हिमाचल में GLOF से हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और इमारतों को खतरा
इन बढ़ती हुई झीलों में से कई खासकर अचानक टूटकर बाढ़ लाने के बड़े खतरे में हैं। इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहते हैं। अध्ययन चेतावनी देता है कि अगर ब्यास बेसिन में हिमसू झील टूटती है, तो इससे 94 इमारतें बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। इनमें उहल-III और पंडोह बांध के इन्फ्रास्ट्रक्चर का कुछ हिस्सा शामिल है। इसी तरह सतलल बेसिन में अगर कोई और बड़ी झील टूटती है, तो 588 इमारतें प्रभावित हो सकती हैं। इनमें कोल्डम प्रोजेक्ट और रामपुर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन झीलों की निगरानी और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।