खास कंप्यूटर, एक रंग के कपड़े और कोचिंग माफिया; झारखंड में कैसे हो रहे थे परीक्षा घोटाले?
क्या है खबर?
झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर छात्रों ने 26 दिन तक प्रदर्शन किया था। इस मामले की जांच कर रही CID ने अब तक 20 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। अभय तिवारी इस घोटाले का मुख्य सरगना बताया जा रहा है, जिसने पूछताछ में CBI को कई खुलासे किए हैं। वहीं, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते भी गिरफ्तार हुए हैं।
कंपनी
ब्लैकलिस्ट कंपनी को ही फिर सौंपा गया काम
इन गड़बड़ियों के केंद्र में है TDPL यानी TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड। इस कंपनी को झारखंड सरकार ने मई 2025 में ब्लैकलिस्ट कर दिया था।
न्यूज18 के मुताबिक, संकेत मिलता है कि JPSC में साजिश रचे जाने के बाद सहयोग करने वाली कंपनी का चयन करना ही पहला कदम था।
इसके बावजूद JPSC ने फिर से कंपनी को नई परीक्षाओं का काम दिया। इसके मार्केटिंग मैनेजर तिवारी ने परीक्षा केंद्रों, कोचिंग संस्थानों और उम्मीदवारों से संपर्क किया।
पैसे
5 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक वसूले गए
जांच में पता चला है कि माफिया ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश करते थे, जो पैसे का भुगतान करने के लिए राजी हों। उम्मीदवारों से प्रारंभिक परीक्षा पास कराने में मदद करने के लिए कथित तौर पर 5 लाख रुपये तक लिए जाते थे।
जांच में शामिल एक अधिकारी ने न्यूज18 से कहा, "एक भर्ती परीक्षा में, जहां 20 पद थे, मुख्य परीक्षा पास करने में मदद करने के लिए उम्मीदवारों से 1 करोड़ रुपये तक की रकम वसूली गई।"
कोचिंग संस्थान
गड़बड़ी में शामिल थे कोचिंग संस्थान
CID ने मामले में 9 आरोपियों को फरार घोषित किया है। इनमें से ज्यादातर कोचिंग संस्थानों से जुड़े हैं। इनमें से कुछ संस्थान परीक्षा केंद्रों के रूप में भी काम कर रहे थे।
CID ने रांची के आदित्य पांडे और पवन कुमार सिंह, पलामू के रवि शंकर कुमार और संतोष कुमार सिंह, बोकारो के सनंद प्रकाश और अभय तिवारी के बहनोई, गिरिडीह के सौरभ पांडे की पहचान प्रमुख साजिशकर्ताओं के रूप में की है।
कम्प्यूटर
रिश्वत देने वाले अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित थे विशेष कंप्यूटर
एक अधिकारी ने कहा, "जांच में पता चला है कि परीक्षा केंद्र पर रिश्वत देने वाले उम्मीदवारों के लिए 10-12 कंप्यूटर अलग रखे जाते थे। उन्हें परीक्षा के लिए वही कंप्यूटर आवंटित किए जाते थे। इनके तार टाइलों के नीचे छिपाकर दूसरे कमरे में जाते थे, जहां परीक्षार्थी उम्मीदवारों की ओर से परीक्षा देते थे।"
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि संदिग्ध उम्मीदवारों को एक रंग के कपड़े पहनने के लिए कहा गया था, ताकि आसानी से पहचान हो सके।
नेटवर्क
गिरोह की तरह काम कर रहा था पूरा नेटवर्क
अब तक की जांच में संकेत मिले हैं कि ये पूरी तरह से संगठित काम था। इस गिरोह में अधिकारी, परीक्षा एजेंसी, कोचिंग संस्थान, परीक्षा केंद्र, बिचौलियों और उम्मीदवारों से जुड़ा एक पूरा नेटवर्क शामिल है।
राज्य सरकार ने भी माना है कि परीक्षा में धांधली हुई थी और CID को इसके सबूत भी मिले हैं।
वहीं, प्रदर्शनकारी छात्रों ने आंदोलन स्थगित कर दिया है और राज्य सरकार को 2 महीने का समय दिया है।