देश में जल्द ही 25 रुपये का बिकेगा एक अंडा, जानिए थाली से क्यों दूर हो रहा ये प्रोटीन
पूरे भारत में अंडे महंगे हो रहे हैं और इसकी मुख्य वजह है मुर्गियों के चारे का महंगा होना। सोयाबीन मील और मक्के की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, जिससे अंडे के उत्पादन का खर्च भी बढ़ गया है। सोयाबीन मील के दाम 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुके हैं। वहीं, एथेनॉल बनाने के लिए मक्के का ज्यादा इस्तेमाल होने लगा है, जिसके चलते बाजार में इसकी आपूर्ति कम हो गई है। इन्हीं कारणों से अब एक अंडे के उत्पादन में 5 रुपये 20 पैसे से लेकर 5 रुपये 50 पैसे तक का खर्च आ रहा है, जबकि पहले यह 4 रुपये से 4 रुपये 50 पैसे के बीच था।
खर्चा कम करने के लिए किसान कर रहे मुर्गियों की छंटाई
बढ़ते खर्च को नियंत्रित करने के लिए किसान अपनी पुरानी मुर्गियों को समय से पहले बेच रहे हैं और नए चूजों की संख्या भी घटा रहे हैं। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में अंडे कम मिल सकते हैं। महाराष्ट्र में पिछले एक साल में अंडे के दाम 40 प्रतिशत बढ़कर 7 रुपये 50 पैसे से 9 रुपये प्रति अंडे तक पहुंच गए हैं। इसकी वजह यह है कि राज्य के भीतर अंडे की आपूर्ति पर्याप्त नहीं है और लगभग आधे अंडे दूसरे राज्यों से मंगाए जाते हैं।
बड़े ब्रांड्स अंडे के दाम कर सकते हैं 20-25 रुपये
एगोज और कंट्री चिकन जैसे प्रीमियम ब्रांड्स भी इस महंगाई से अछूते नहीं हैं। उनकी उत्पादन लागत इतनी बढ़ गई है कि वे एक अंडे के लिए 20 से 25 रुपये तक वसूल कर सकते हैं। इन ब्रांड्स के चारे के लिए सख्त मानक होते हैं, इसलिए वे गुणवत्ता से समझौता नहीं कर सकते। उम्मीद है कि इस साल के आखिर में नई फसल आने से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन एथेनॉल की इतनी ज्यादा मांग है कि मुर्गियों का चारा और अंडे, दोनों ही महंगे रहेंगे, चाहे वे उत्पादक हों या उपभोक्ता।