सोनम वांगचुक का प्रधानमंत्री मोदी को खुला पत्र, कहा- रेत पर हो सकता है अगला महाकुंभ
क्या है खबर?
लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर हिमालय के ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने पर चिंता जताई है।
उन्होंने अपने पत्र में इन ग्लेशियरों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया क्योंकि ये गंगा और यमुना जैसी भारत की पवित्र नदियों का स्रोत हैं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "इसका यह भी अर्थ हो सकता है कि अगला महाकुंभ पवित्र नदी के रेतीले अवशेषों पर ही आयोजित किया जाएगा।"
अपील
वांगचुक ने प्रधानमंत्री मोदी से की यह खास अपील
वांगचुक ने प्रधानमंत्री मोदी से हिमालय के ग्लेशियरों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए आयोग गठित करने का भी आग्रह किया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी नदियां मौसमी हो सकती हैं।
उन्होंने कहा, "जैसा कि हम सभी जानते हैं, हिमालय के ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघल रहे हैं, और अगर यह और वनों की कटाई वर्तमान दर से जारी रही, तो हमारी पवित्र नदियां मौसमी हो सकती हैं।"
इच्छा
वांगचुक ने जताई प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की इच्छा
वांगचुक ने लद्दाख के समुदाय के सदस्यों के लिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक की भी मांग की ताकि वे लद्दाख के तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों में से एक से बर्फ का टुकड़ा लेकर आ सकें।
इस प्रतीकात्मक पहल का उद्देश्य क्षेत्र के जलवायु प्रभावित लोगों का संदेश देना है।
संयुक्त राष्ट्र ने इस मामले पर वैश्विक चिंताओं को रेखांकित करते हुए 2025 को 'ग्लेशियरों के संरक्षण का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष' घोषित किया है।