स्लीपर बसों में हुए हादसों को लेकर केंद्र सरकार सख्त, ये कदम उठाने जा रही
क्या है खबर?
पिछले साल स्लीपर बसों से जुड़ी 6 बड़ी घटनाओं में 145 लोगों की जान जाने के बाद केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े नियम सख्त कर दिए हैं। सरकार जल्द ही स्लीपर बसों का निर्माण केवल ऑटोमोबाइल कंपनियों और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों से करवा सकती है। साथ ही अभी मौजूद स्लीपर बसों को भी नए सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपग्रेड करना होगा।
नियम
चेतावनी प्रणाली स्थापित करना होगा
गडकरी ने बताया कि स्लीपर बस के संचालन में अग्नि सुरक्षा प्रणाली, हथौड़ों के साथ आपातकालीन निकास द्वार, आपातकालीन प्रकाश व्यवस्था और चालक उनींदापन चेतावनी प्रणाली (ADAS) स्थापित करना अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि हाल में हुई घटनाएं इन्हीं प्रमुण कारणों से हुई है, जिसमें बसों में ज्वलनशील आंतरिक सामग्री, अवरुद्ध निकास द्वार, आपातकालीन खिड़कियों का न होना और बुनियादी अग्नि सुरक्षा उपकरणों का अभाव था। उन्होंने स्लीपर बसों को बॉडी कोड AIS-052 का अनिवार्य पालन करने को कहा।
मानक
क्या है AIS-052?
भारत का बस बॉडी कोड AIS-052 देश में निर्मित सभी बसों के लिए अनिवार्य मानक है। यह कोड सुरक्षा, संरचना और डिजाइन के लिए मानदंड तय करता है। इसे सितंबर 2025 में लागू किया गया है। यह मानक केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR) के तहत ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने तैयार किया है, जो उद्योग का आचार संहिता है। यह मानक सभी शहरी बसें, अंतर-शहरी कोच, स्कूल बसें या अन्य यात्री बसों में लागू है।
बदलाव
क्या कहता है मानक?
AIS-052 का उद्देश्य बस की बॉडी डिजाइन, संरचना, सुरक्षा मानक, आराम, आपातकालीन साधन के नियम निर्धारित करके यात्री परिवहन को ठीक करता है। इस नियम के मुताबिक ही बस की बॉडी डिजाइनिंग और बुनियादी ढांचा, बैठने की व्यवस्था, गलियारा, आपातकालीन निकास द्वार, सीटें, हैंडल, आपातकालीन निकास द्वार को बनाया जाता है। इससे सड़क पर होने वाले हादसों की संभावना कम हो सकती है या उसे रोकी जा सकती है।
हादसा
पिछले 6 महीने के बड़े बस हादसे
14 अक्टूबर को राजस्थान में जैसलमेर-जोधपुर राजमार्ग पर AC स्लीपर बस में आग लगई, जिसमें 20 यात्रियों की जलकर मौत हो गई। 24 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के कुरनूल में एक निजी बस में आग लग गई, जिसमें 20 यात्री जलकर मर गए। 16 दिसंबर को यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की टक्कर के बाद आग लगने से 19 लोगों की मौत हो गई। दिसंबर में बेंगलुरु, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी बड़े हादसे हुए थे।