विदेश मंत्री जयशंकर और चुनाव आयुक्त संधु को SIR के नोटिस, आडवाणी, सिब्बल का भी नाम
क्या है खबर?
दिल्ली में SIR के दौरान मचे घमासान के बीच खबर है कि चुनाव आयुक्त SS संधू, विदेश मंत्री एस जयशंकर और भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को नोटिस भेजा गया है। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इनके अलावा कांग्रेस नेता और वरिष्ठ सांसद कपिल सिबल, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी और विदेश सचिव विक्रम मिसरी को भी नोटिस भेजे गए हैं।
रिपोर्ट
सिब्बल और मिसरी को क्यों जारी किए गए नोटिस?
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त SS संधू को नाम की वर्तनी में अंतर के कारण नोटिस जारी किया गया है। यानी मतदाता सूची में दर्ज नाम और दूसरे उपलब्ध रिकॉर्ड में नाम के बीच वर्तनी का अंतर सामने आया है।
वहीं, कपिल सिब्बल और विदेश सचिव विक्रम मिसरी को इसलिए नोटिस जारी किए गए हैं, क्योंकि उनके नाम SIR के पिछले रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे हैं।
सूची में आडवाणी की बेटी प्रतिभा आडवाणी का भी नाम है।
विदेश मंत्री
विदेश मंत्री को क्यों भेजा गया नोटिस?
रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेश मंत्री जयशंकर और उनकी पत्नी केएस जयशंकर को भी नोटिस भेजे गए हैं। जानकारी के मुताबिक, इनके नाम चुनावी रिकॉर्ड के सत्यापन के दौरान सामने आए हैं।
यहां समझना जरूरी है कि नोटिस जारी होने का मतलब मतदाता सूची से नाम कटना नहीं है। दरअस, SIR के दौरान रिकॉर्ड का मिलान किया जाता है। ऐसे में पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा जानकारी के बीच अंतर आने पर नोटिस जारी किया जाता है।
केजरीवाल
केजरीवाल और मुख्यमंत्री गुप्ता को भी नोटिस
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी नोटिस भेजे गए हैं।
पुरानी मतदाता सूची के हिसाब से मुख्यमंत्री गुप्ता और उनके माता-पिता की उम्र के बीच अंतर 15 साल से कम था। उन्होंने सही दस्तावेज जमा कर दिए हैं।
वहीं, केजरीवाल को नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के वोटर रिकॉर्ड को पिछली SIR से जुड़ा नहीं होने पर नोटिस मिला है। उनकी पत्नी सुनीता, माता-पिता और बेटे को भी नोटिस भेजा गया है।
नोटिस
क्या है नोटिस जारी किए जाने का मतलब?
SIR के दौरान मतदाता के रिकॉर्ड का विस्तृत सत्यापन किया जाता है। इस दौरान पुराने रिकॉर्ड से नाम का मिलान नहीं होना या नाम की वर्तनी में अंतर सामने आने पर नोटिस जारी किया जाता है।
यानी केवल नोटिस जारी होना वोटर पात्रता पर अंतिम फैसला नहीं है। नोटिस मिलने पर आप दस्तावेजों के जरिए गड़बड़ी को सही करा सकते हैं। आपको आपत्ति दर्ज कराने के लिए भी समय दिया जाता है।