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सिख विरोधी दंगा 1984: दिल्ली कोर्ट ने जनकपुरी-विकासपुरी हिंसा मामले में सज्जन सिंह को बरी किया
पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार सिख विरोधी दंगे के एक मामले में बरी

सिख विरोधी दंगा 1984: दिल्ली कोर्ट ने जनकपुरी-विकासपुरी हिंसा मामले में सज्जन सिंह को बरी किया

लेखन गजेंद्र
Jan 22, 2026
11:35 am

क्या है खबर?

दिल्ली की एक कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगे के एक मामले में बरी कर दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने दिल्ली के जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में हिंसा भड़काने के आरोप से जुड़े मामले में सज्जन को बरी करने का मौखिक फैसला सुनाया। हालांकि, अभी विस्तृत और तर्कसंगत आदेश अभी जारी किया जाना बाकी है।

बचाव

सज्जन कुमार ने अपने बचाव में क्या कहा?

कोर्ट में सज्जन कुमार ने अपने बचाव में खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया और कहा कि मामले में उनकी कोई संलिप्तता नहीं है। उन्होंने बताया कि वह सपने में भी इस तरह की घटना में शामिल नहीं हो सकते। कुमार ने कोर्ट को बताया कि घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी का भी कोई सबूत नहीं मिला है। उनके वकील कहा कि कुमार का नाम 36 साल बाद मामले में जोड़ा गया है, जिससे आरोपों की विश्वसनीयता कमजोर हुई है।

घटना

क्या है जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा का मामला?

सिख हिंसा के कई साल बाद विशेष जांच दल (SIT) ने 2015 में सज्जन कुमार के खिलाफ 2 FIR दर्ज की थी, जो जनकपुरी-विकासपुरी में 1984 में हुई हिंसा से जुड़ी शिकायतों के आधार पर थी। पहली FIR में आरोप था कि 1 नवंबर, 1984 को सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या कर दी गई। दूसरी FIR गुरचरण सिंह की हत्या से संबंधित है, जिन्हें 2 नवंबर, 1984 को विकासपुरी में जिंदा जलाया गया था।

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सजा

क्या जेल से बाहर आएंगे सज्जन कुमार?

भले ही सज्जन कुमार को सिख दंगों से जुड़े 2 मामलों में बरी कर दिया गया हो, लेकिन अभी वे जेल में ही रहेंगे। 25 फरवरी, 2025 को निचली कोर्ट ने उन्हें 1 नवंबर, 1984 को सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुंदीप सिंह की हत्या के लिए उम्रकैद और पालम कॉलोनी में 5 लोगों की हत्या से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उनकी अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

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