भारत-अमेरिका व्यापार समझौता संबंधों को बेहतर दिशा दे सकता है- जयशंकर
भारत और अमेरिका एक नए व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं, लेकिन यह उतना आसान नहीं है जितना लग रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खुद माना कि इसमें कई "मुश्किलें" हैं।
उन्होंने बताया कि भारत में छोटे उत्पादक, छोटे किसान और छोटी फैक्ट्रियां ज्यादा हैं। इसके अलावा, भारत और अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय में भी बड़ा फर्क है। दोनों देशों में उत्पादन का तरीका और समाज की बनावट भी बहुत अलग है।
उन्होंने कहा कि इस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए धैर्य और बारीक बातचीत की जरूरत होगी।
जयशंकर ने कहा कि अगर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होता है, तो इससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को "बेहतर" दिशा में आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
बातचीत के दौरान जयशंकर से पिछले एक साल में भारत-अमेरिका संबंधों, खासकर व्यापार और टैरिफ को लेकर सवाल पूछा गया। उनसे यह भी पूछा गया कि दोनों देशों के रिश्तों को "बेहतर दिशा" में ले जाने के लिए क्या जरूरी होगा?
जयशंकर ने कहा, "अगर मैं पीछे हटकर इस रिश्ते को देखूं... तो मैं देखता हूं कि दुनिया के कई देशों के अमेरिका के साथ रिश्ते अधिक कठिन रहे हैं। मेरा मतलब है कि यह हमारे लिए कोई सांत्वना नहीं हो सकती, लेकिन यह एक वास्तविकता है।"
टैरिफ के बीच पीयूष गोयल का अमेरिकी दौरा
समझौते का पहला हिस्सा फरवरी, 2026 में घोषित हुआ था, लेकिन अमेरिका के टैरिफ सिस्टम में बदलावों के कारण दोनों देश तब से अपने द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखे हुए हैं।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के दौर के पुराने टैरिफ हटा दिए थे, इसलिए दोनों देशों को एक नई योजना बनानी पड़ रही है। साथ ही, कुछ भारतीय सामानों पर "जबरन मजदूरी" को लेकर अमेरिका ने नए टैरिफ लगाए हैं, जिससे मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस हफ्ते अमेरिका जा रहे हैं। उम्मीद है कि उनकी इस यात्रा से बातचीत में तेजी आएगी।