IIT बॉम्बे में जातिगत प्रतिनिधित्व का चौंकाने वाला सच, SC, ST, OBC प्रोफेसरों की संख्या न के बराबर
IIT बॉम्बे मुश्किल सवालों में घिर गया है। एक RTI से पता चला है कि 412 प्रोफेसरों में से महज 5 अनुसूचित जातियों (SC) के हैं और 6 अन्य पिछड़ा वर्गों (OBC) से हैं, जबकि अनुसूचित जनजातियों (ST) का एक भी नुमाइंदा नहीं है।
यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब दलित छात्र साहिल वाकोडे की कथित आत्महत्या के मामले में जातिगत भेदभाव या टिप्पणियों के आरोपों की जांच अभी चल ही रही है।
गौड़ किरण कुमार ने भर्ती में भेदभाव का दावा किया
SC, ST और OBC की कम नुमाइंदगी सिर्फ ऊंचे पदों तक ही सीमित नहीं है; सहायक और एसोसिएट प्रोफेसर स्तर पर भी इसी तरह की कमियां दिखती हैं। फरवरी 2026 के बाद से SC फैकल्टी की संख्या में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।
अखिल भारतीय OBC छात्र संघ के अध्यक्ष गौड़ किरण कुमार कहते हैं कि यह साफ तौर पर भर्ती प्रक्रिया में गहरे भेदभाव की तरफ इशारा करता है। गौड़ किरण कुमार का कहना है कि, 'हमारे कई प्रमुख संस्थान अब भी योग्य SC, ST और OBC PhD धारकों को पर्याप्त अवसर नहीं दे पा रहे हैं। इनमें वे विद्वान भी शामिल हैं, जिन्होंने इन्हीं संस्थानों और विदेशों के विश्वविद्यालयों से अपनी डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की है।'