
RSS प्रमुख बोले, दुनिया में सबसे ज्यादा सुखी भारत के मुसलमान, क्योंकि हमारी संस्कृति हिंदू है
क्या है खबर?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि दुनिया में सबसे ज्यादा सुखी मुसलमान में मिलेंगे क्योंकि हमारी संस्कृति हिंदू है।
उन्होंने कहा कि हिंदू किसी पूजा, भाषा, प्रांत या प्रदेश का नाम नहीं, बल्कि एक संस्कृति का नाम है जो भारत में रहने वाले सभी लोगों की सांस्कृतिक विरासत है।
भागवत ने कहा कि विश्व में जब भी कोई देश सही रास्ते से भटका, वह सत्य की खोज में भारत आया है।
बयान
भागवत बोले, अंग्रेजों के आने से भारत की उन्नति हुई, ऐसा कहना गलत
ओडिशा के नौ दिवसीय दौरे पर आए मोहन भागवत ने शनिवार को भुवनेश्वर में एक कार्यक्रम में ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा, "लोगों को लगता है कि अंग्रेजों के आने से भारत की उन्नति हुई, गलत बात है। हम क्लासलेस सोसाइटी की स्थापना, गोरे लोग हमारे देश में नहीं आते तो भी वेदों के आधार पर कर सकते हैं। हमारी परंपरा क्या है... हमारा राष्ट्र कौनसा है, इसके बारे में समान भावना हमेशा हमारे देश में थी।"
बयान
"हम हिंदुओं का देश, हिंदू राष्ट्र हैं"
भागवत ने आगे कहा, "हम हिंदुओं का देश हैं, हिंदू राष्ट्र हैं और हिंदू किसी पूजा का नाम नहीं, भाषा का नाम नहीं, किसी प्रांत-प्रदेश का नाम नहीं, हिंदू एक संस्कृति का नाम है जो भारत में रहने वाले सभी की सांस्कृतिक विरासत है।"
विरासत
भागवत ने कहा, जो भी लड़खड़ाया सत्य की खोज में भारत ही आया
भागवत ने कहा कि भारत की संस्कृति विविधताओं को स्वीकार और सम्मान करने वाली संस्कृति है और इसलिए विश्व का हर देश लड़खड़ाने पर सत्य की पहचान करने भारत आया।
उन्होंने कहा, "ये हमारा इतिहास रहा है। मारे-मारे यहूदी फिरते थे, अकेला भारत है जहां उनको आश्रय मिला है। पारसियों की पूजा उनके मूल धर्म समेत सुरक्षित केवल भारत में है। विश्व के सभी देशों में सर्वाधिक सुखी मुसलमान भारत में मिलेगा... क्योंकि हम हिंदू हैं।"
बयान
RSS के मन में किसी के प्रति नफरत नहीं- भागवत
भागवत ने आगे कहा कि भारत में कई लोग कुछ लोग अपनी हिंदू पहचान को जाहिर करने में शर्म महसूस करते हैं जबकि कुछ गर्व के साथ इसे कहते हैं और कुछ लोग अपने हितों के कारण छुपकर इस बात को स्वीकार करते हैं।
उन्होंने कहा कि RSS के मन में किसी के प्रति नफरत नहीं है और उसका लक्ष्य सिर्फ हिंदू समुदाय को बदलना नहीं हैं, बल्कि देश में पूरे समाज को संगठित करना है।
मॉब लिंचिंग पर बयान
मॉब लिंचिंग को पश्चिमी तरीका बता चुके हैं भागवत
बता दें कि मोहन भागवत इससे पहले दशहरा के दिन मॉब लिंचिंग पर भी बयान दे चुके हैं।
उन्होंने कहा था, "हिंसा की कुछ घटनाओं को लिंचिंग के तौर पर पेश करने का असल मकसद हमारे देश और हिंदू समाज को बदनाम करना और कुछ समुदायों में भय पैदा करना है। लिंचिंग का भारत से कुछ लेना-देना नहीं है। लिंचिंग अपने आप में एक पश्चिमी तरीका है। इसकी उत्पत्ति किसी अन्य धर्म की एक कहानी से हुई है।"
बयान
"मॉब लिंचिंग से RSS या स्वयंसेवकों का कोई संबंध नहीं"
भागवत ने कहा था कि मॉब लिंचिंग से RSS या उसके स्वयंसेवकों का कोई संबंध नहीं है और केवल राजनीति के लिए उनका नाम खींचा जाता है। उन्होंने कहा था कि भारत की परंपरा उदारता की है, मिलकर रहने की है।