चीनी की कीमतों में आया 40 प्रतिशत का उछाल, बिगड़ा रसोई का बजट
पिछले एक साल में चीनी के खुदरा दाम करीब 40 प्रतिशत बढ़ गए हैं और कुछ राज्यों में तो ये बढ़ोतरी 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उदाहरण के लिए ओडिशा में तो चीनी की कीमत 67.4 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि पिछले साल अगस्त में यह 46.89 रुपये थी। पूरे देश में भी औसत कीमत 46.3 रुपये से बढ़कर 62.47 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी की वजह से मिठाइयां और स्नैक्स अब सबके लिए महंगे हो गए हैं।
चीनी के बढ़ते दाम पर सरकार ने लगाई पाबंदी
थोक कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है और इसके पीछे कई कारण हैं। कम पैदावार, खराब मौसम से फसल का नुकसान, दुनिया भर से सप्लाई की दिक्कतें, त्योहारों की मांग और ट्रेडर्स की सट्टेबाजी, सब कुछ इसमें शामिल है। एक तरफ विपक्षी दल सरकार के एथेनॉल प्रोग्राम को चीनी की कमी का जिम्मेदार बता रहे हैं। उनका आरोप है कि गन्ने का एक बड़ा हिस्सा चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रहा है। वहीं, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि एथेनॉल के लिए गन्ने का डाइवर्जन पहले के 12 प्रतिशत से घटकर अब 9 प्रतिशत पर आ गया है। किसान संगठन भी बड़े ट्रेडर्स पर आरोप लगा रहे हैं कि वे कीमतें बढ़ाने के लिए चीनी को जमा कर रहे हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने डीलरों के स्टॉक पर सीमा लगा दी है, जो 30 नवंबर तक रहेगी।