भारत की बिजली का कायापलट! 2030 तक 60 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्यों है जरूरी?
एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को साल 2030 तक 60 गीगावाट से भी ज्यादा ऊर्जा भंडारण की जरूरत होगी। इसकी वजह यह है कि देश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस कुल क्षमता में से करीब 42 गीगावाट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) से मिलेगा। भारत का लक्ष्य अपनी आधी बिजली नॉन-फॉसिल फ्यूल्स से पैदा करना है, और इस लक्ष्य को पाने के लिए BESS बिजली की सप्लाई और मांग के बीच संतुलन बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
भारत की रिपोर्ट: BESS के लिए स्पष्ट नियम जरूरी
ऊर्जा भंडारण को सिर्फ एक तकनीकी सुधार मानना गलत होगा। यह बेहद जरूरी है ताकि जब हम सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों की ओर बढ़ें, तब भी हमारे घरों में बिजली की रोशनी बनी रहे। रिपोर्ट बताती है कि BESS बिजली ग्रिड को कहीं ज्यादा लचीला और भरोसेमंद बना सकते हैं। खासकर दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहरों में, जहां बिजली की पीक डिमांड को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती होती है, वहां ये बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। रिपोर्ट नीति निर्माताओं से अपील करती है कि वे इन तकनीकों के लिए स्पष्ट नियम बनाएं, ताकि ये अपनी पूरी क्षमता से काम कर सकें और भारत एक स्वच्छ, भरोसेमंद ऊर्जा भविष्य की तरफ बढ़ सके।