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भारत के मशहूर फोटोग्राफर रघु राय का 83 साल की उम्र में निधन, मिला था पद्मश्री
मशहूर फोटोग्राफर रघु राय का निधन हो गया है

भारत के मशहूर फोटोग्राफर रघु राय का 83 साल की उम्र में निधन, मिला था पद्मश्री

Apr 26, 2026
03:39 pm

क्या है खबर?

भारतीय फोटो पत्रकारिता के दिग्गज और विश्व प्रसिद्ध फोटोग्राफर रघु राय का रविवार को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे। उनके बेटे नितिन राय ने उनकी मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि वह पिछले 2 सालों से कैंसर से जूझ रहे थे। लगातार बीमारी और उपचार के बीच आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन से कला, मीडिया और पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

बीमारी

राय को 2 साल पहले हुआ था प्रोस्टेट कैंसर

नितिन ने बताया कि उनके पिता के 2 साल पहले प्रोस्टेट कैंसर होने का पता चला था। उसके बाद बीमारी का सफल इलाज भी कर दिया गया था। इसके बाद कैंसर पेट तक फैल गया, लेकिन वहां भी इलाज सफल रहा। नितिन ने बताया कि हाल ही में यह बीमारी उनके दिमाग तक पहुंच गई थी और उम्र से जुड़ी परेशानियों की वजह से उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। डॉक्टरों ने उनके उपचार में अपना पूरा अनुभव लगाया था।

परिचय

पाकिस्तान में जन्मे रघु ने भारत में बनाई पहचान

रघु राय का जन्म 18 दिसंबर, 1942 को झंग में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उन्होंने फोटोग्राफी की शुरुआत अपने बड़े भाई एस पॉल से सीखी और धीरे-धीरे इस क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1960 के दशक में की और 1965 में 'द स्टेट्समैन' अखबार में फोटोग्राफर के रूप में काम शुरू किया। यहां उन्होंने कई बड़े राष्ट्रीय घटनाओं को कैमरे में कैद किया। 1976 में वह स्वतंत्र फोटोग्राफर बन गए थे।

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कार्य

रघु ने कहां-कहां किया काम?

रघु 1976 में 'द स्टेट्समैन' छोड़ने के बाद 'संडे' मैगजीन में पिक्चर एडिटर बने। 1977 में उन्हें मशहूर फ्रेंच फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसन ने मैग्नम फोटोज में शामिल होने के लिए चुना गया, जो उनके करियर की बड़ी उपलब्धि रही। 1980 में वह फोटोग्राफर और पिक्चर एडिटर के तौर पर 'इंडिया टुडे' से जुड़ गए और 1992 तक काम किया। इसके अलावा 1990 से 1997 के बीच वह वर्ल्ड प्रेस फोटो की जूरी के सदस्य भी रहे।

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इतिहास

रघु ने रचा आधुनिक भारत का दृश्य इतिहास

रघु की तस्वीरों को आधुनिक भारत का दृश्य दस्तावेज माना जाता है। उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी जैसी दर्दनाक घटनाओं को अपने कैमरे में कैद किया। उनकी चर्चित तस्वीरों में से एक भोपाल गैस त्रासदी के बाद की तस्वीर है, जिसमें एक मासूम बच्चे का निर्जीव शरीर दिखता है। उनकी वह तस्वीर पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र बनी थी। वहीं, उन्होंने मदर टेरेसा और इंदिरा गांधी जैसी हस्तियों की निजी और प्रभावशाली तस्वीरें भी अपने कैमरे में कैद की थी।

लेखन

रघु ने लिखीं 18 से ज्यादा किताबें

अपने पूरे करियर में रघु ने भारत के लोगों, संस्कृति और शहरों पर 18 से ज्यादा किताबें लिखीं। उनकी प्रमुख किताबों में 'रघु राय्स इंडिया: रिफ्लेक्शंस इन कलर' और 'रिफ्लेक्शंस इन ब्लैक एंड व्हाइट' शामिल हैं। उनकी तस्वीरें टाइम, लाइफ, न्यूयॉर्क टाइम्स, न्यूजवीक और द न्यू यॉर्कर जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों में भी प्रकाशित हुईं। उन्हें 1972 में बांग्लादेश युद्ध की शानदार कवरेज करने के लिए पद्मश्री से पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

जानकारी

रघु को ये सम्मान भी मिले

1992 में अमेरिका में रघु को फोटोग्राफर ऑफ द ईयर चुना गया था। 2019 में उन्हें अकादेमी दे बो-आर्ट्स फोटोग्राफी अवॉर्ड मिला था। वहीं 2017 में भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया था।

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